त्रिपुरा सरिंडा को GI पहचान, राज्य की सांस्कृतिक विरासत में एक नया मील का पत्थर

अगरतला, 16 जून: त्रिपुरा के पारंपरिक आदिवासी तार वाले म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट त्रिपुरा सरिंडा को प्रतिष्ठित ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) पहचान मिली है। इस पहचान के साथ, राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर नेशनल लेवल पर खास पहचान मिली है।

इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए, मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इसे त्रिपुरा की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा सरिंडा (म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट) को GI पहचान मिलना राज्य की अमूल्य लोक विरासत के संरक्षण और प्रचार में एक अहम कदम है। साथ ही, यह त्रिपुरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को और मज़बूत करेगा।

मुख्यमंत्री ने इस पहचान को पाने में योगदान देने वाले कारीगरों, शिल्पकारों और संगीतकारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता उनके समर्पण, कौशल और रचनात्मक प्रयासों का नतीजा है। यह पहचान त्रिपुरा की पारंपरिक कला और संस्कृति को नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर और ज़्यादा पहचान दिलाएगी और इसके विकास के नए मौके पैदा करेगी।

त्रिपुरा सरिंडा के शामिल होने के साथ, राज्य में GI-मान्यता प्राप्त प्रोडक्ट्स की संख्या अब चार हो गई है। इससे पहले, क्वीन पाइनएप्पल, पारंपरिक त्रिपुरा रिशा और पचरा (रिग्नाई) और माताबारी पेरा को GI मान्यता मिल चुकी थी। इन पहचानों को त्रिपुरा की समृद्ध विरासत, संस्कृति और खास पहचान का एक चमकता हुआ प्रतीक माना जाता है।

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