नई दिल्ली, 13 जुलाई: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारी के तहत क्रू मॉड्यूल सिस्टम से जुड़े तीन महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इन परीक्षणों से अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और मिशन की विश्वसनीयता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
पहले परीक्षण में क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम (Crew Module Uprighting System) की क्षमता को परखा गया। यह प्रणाली समुद्र में उतरने (स्प्लैशडाउन) के बाद क्रू मॉड्यूल को दोबारा सीधी स्थिति में लाने का काम करती है। यह प्रणाली संग्रहित ठंडी गैस (Stored Cold-Gas Technology) पर आधारित है और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है।
दूसरे परीक्षण में उस अम्बिलिकल मैकेनिज्म (Umbilical Mechanism) के अलग होने की प्रक्रिया को जांचा गया, जो अंतरिक्ष यात्रियों वाले क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से जोड़ता है। सर्विस मॉड्यूल मिशन के दौरान ऊर्जा और प्रणोदन (Propulsion) उपलब्ध कराता है।
इस मैकेनिज्म में दो इकाइयां होती हैं—क्रू मॉड्यूल की ओर CSU-1 और सर्विस मॉड्यूल की ओर CSU-2। पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश (Re-entry) के दौरान CSU-1 के अलग होने के बाद सर्विस मॉड्यूल क्रू मॉड्यूल से अलग हो जाता है। इसके बाद पुनः प्रवेश से ठीक पहले CSU-2 भी अलग हो जाता है।
ISRO ने सिमुलेटेड क्रू मॉड्यूल के माध्यम से CSU-2 के अलगाव का परीक्षण किया। इस परीक्षण में CSU-2 के सुरक्षित और सुचारु रूप से अलग होने के साथ-साथ क्रू मॉड्यूल पैनल और उसके इंटरफेस की संरचनात्मक मजबूती भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित हुई।
तीसरे परीक्षण में एपेक्स कवर (Apex Cover) के अलग होने के दौरान क्रू मॉड्यूल की संरचनात्मक मजबूती की जांच की गई। एपेक्स कवर मिशन के दौरान पैराशूट और उससे जुड़े उपकरणों की सुरक्षा करता है। पैराशूट खुलने से पहले इसे अलग कर दिया जाता है, जिससे क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित हो सके।
ISRO के अनुसार, ये परीक्षण गगनयान मिशन के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रणालियों को प्रमाणित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
