नई दिल्ली, 10 जुलाई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कुशल मानव संसाधन, मजबूत संस्थागत ढांचे और नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के कारण भारत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने के लिए दुनिया का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई राष्ट्रीय जीसीसी बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश में वर्तमान में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमें प्रत्यक्ष रूप से लगभग 23 लाख पेशेवर कार्यरत हैं और ये प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित कर रहे हैं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर केवल सेवाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंजीनियरिंग, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा, वित्त, उत्पाद डिजाइन और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों को एक मंच पर लाकर निरंतर नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब अपने नए कैपेबिलिटी सेंटर भारत में स्थापित करने को अन्य देशों की तुलना में अधिक प्राथमिकता दे रही हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र दुनिया का सबसे बड़ा संगठित ज्ञान निर्यात केंद्र बन चुका है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जीसीसी अब वैश्विक नेतृत्व, रणनीतिक निर्णय लेने और नवाचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल दुनिया के कैपेबिलिटी सेंटरों की मेजबानी करना नहीं, बल्कि भविष्य की नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और उद्यमों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाना है।
