नईदिल्ली, 7 जून : सरकार ने आज कहा कि अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारतीय घरों को खाना पकाने की गैस वैश्विक स्तर पर सबसे कम कीमतों पर मिल रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय सिलेंडर की कीमत किसी भी पड़ोसी देश की तुलना में सस्ता है और अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थी को पहले चार रिफिल पर सालाना 300 रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण मिलने के बाद 14 किलो 200 ग्राम के एलपीजी सिलेंडर के लिए 642 रुपये का भुगतान करना पड़ता है, जबकि दिल्ली में एक आम उपभोक्ता के लिए खुदरा मूल्य 942 रुपये है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि होर्मुज संकट के कारण खाड़ी देशों में आपूर्ति बाधित होने से एलपीजी के लिए सऊदी सीपी बेंचमार्क में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 14 किलो 200 ग्राम के सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1600 रुपये से अधिक हो गई। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि सरकार ने अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के प्रभाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए बढ़ी हुई कीमत का एक बड़ा हिस्सा स्वयं वहन किया है।
मंत्रालय ने बताया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों द्वारा चुकाई गई प्रभावी कीमत पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित पड़ोसी देशों में खाना पकाने की गैस की कीमतों से कम है।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान ऊर्जा सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डालते हुए, सरकार ने कहा कि भारत उन कुछ देशों में से था जो समुद्री यातायात में गंभीर व्यवधान के बावजूद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से ऊर्जा माल की आवाजाही जारी रखने में सफल रहा। इसने कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है, और एलपीजी की बॉटलिंग और वितरण गतिविधियाँ सामान्य रूप से जारी हैं।
मंत्रालय ने आगे कहा कि व्यवधान की अवधि के दौरान घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राज्य अमरीका, कनाडा और अल्जीरिया सहित अन्य देशों से भी आपूर्ति की गई।
