तृणमूल विधायक संगीता रॉय के अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र की जांच शुरू

कोलकाता, 28 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस की विधायक संगीता रॉय के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र की जांच शुरू कर दी। इस संबंध में उन्हें दोबारा सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया है।

संगीता रॉय पूर्व तृणमूल सांसद और वर्तमान में नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया की पत्नी हैं।

कूचबिहार जिले की सिताई विधानसभा सीट लंबे समय से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद जगदीश चंद्र बसुनिया ने सिताई विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद हुए उपचुनाव में संगीता रॉय इस सीट से विधायक चुनी गईं और इसी वर्ष संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दोबारा निर्वाचित हुईं।

मंगलवार को उपमंडल अधिकारी (एसडीओ) के निर्देश पर सिताई ब्लॉक के ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) ने संगीता रॉय को अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र के पुनः सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया।

विधानसभा चुनाव के दौरान संगीता रॉय के जाति प्रमाणपत्र को लेकर सवाल उठे थे। इस संबंध में एसडीओ कार्यालय में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता अशुतोष बराम को प्रशासनिक स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिलने पर उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया।

इसके बाद मंगलवार को संगीता रॉय को एसडीओ कार्यालय में उपस्थित होकर अपने अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र का पुनः सत्यापन कराने का नोटिस दिया गया। नोटिस की एक प्रति आईएएनएस के पास उपलब्ध है।

हालांकि, जब बीडीओ कार्यालय के कर्मचारी मंगलवार दोपहर उनके आवास पर नोटिस देने पहुंचे, तब संगीता रॉय घर पर मौजूद नहीं थीं। इसके बाद कर्मचारियों ने नोटिस की प्रति उनके आवास की दीवार पर चस्पा कर दी।

इस मामले पर संगीता रॉय की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। वहीं, खबर लिखे जाने तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।

गौरतलब है कि संगीता रॉय वर्तमान में पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के “विद्रोही लेकिन बहुमत” गुट की सदस्य मानी जाती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि वह अब भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना सर्वोच्च नेता मानती हैं।

–आईएएनएस

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