फिलीपींस की विदेश मंत्री से मिले जयशंकर, रणनीतिक साझेदारी और इंडो-पैसिफिक हालात पर हुई चर्चा

मनीला, 22 जुलाई (आईएएनएस): विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को मनीला में फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-फिलीपींस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की ताजा स्थिति पर व्यापक चर्चा हुई।

बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जयशंकर ने कहा कि फिलीपींस की विदेश मंत्री के साथ उनकी बेहद सार्थक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, रक्षा एवं सुरक्षा, समुद्री सहयोग, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर भी चर्चा की गई।

वहीं, फिलीपींस की विदेश मंत्री लाजारो ने भी ‘एक्स’ पर कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर रचनात्मक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि फिनटेक, व्यापार एवं निवेश, उच्च शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के बीच तनाव बढ़ा है। फिलीपींस का आरोप है कि 20 जुलाई को सेकेंड थॉमस शोल क्षेत्र में चीन ने उसके नौसैनिक कर्मियों के खिलाफ “खतरनाक और आक्रामक” कार्रवाई की।

भारत के लिए दक्षिण चीन सागर का घटनाक्रम रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार इंडो-पैसिफिक के समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता, निर्बाध समुद्री व्यापार और समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है।

हाल ही में भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के प्रावधानों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। साथ ही नौवहन की स्वतंत्रता, हवाई मार्गों की स्वतंत्रता और वैध समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर भी जोर दिया।

इस बीच, अमेरिका के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, ब्रिटेन समेत 12 देशों ने वर्ष 2016 के ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले की दसवीं वर्षगांठ पर एक संयुक्त बयान जारी कर “स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले, आसियान-भारत 2026 पोस्ट-मिनिस्टीरियल सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए ‘आसियान सेंट्रेलिटी’ एक मूलभूत सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि आसियान का इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण और भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में लगभग 200 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत और आसियान को क्षेत्र की शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा।

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