चेन्नई, 22 जुलाई (आईएएनएस): तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के उथंगराई विधायक इलैयाराजा को कथित तौर पर दल-बदल के लिए प्रलोभन देने के मामले की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। मामले में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलू की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक टीम करूर पहुंची है।
तमिलनाडु के हालिया सबसे चर्चित राजनीतिक मामलों में शामिल इस प्रकरण की जांच चेन्नई की ट्रिप्लिकेन पुलिस कर रही है। अब तक इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच के विभिन्न चरणों में पुलिस तीन करोड़ रुपये से अधिक की नकदी भी बरामद कर चुकी है।
जांच के दौरान पूर्व तमिलनाडु मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को पूछताछ के लिए तलब किया गया था। हालांकि, दोनों ने अदालत से अग्रिम जमानत हासिल कर ली, जिसके कारण उन्हें तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं की जा सकी। उन्हें अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।
मामले में 18 जुलाई की रात महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब करूर टाउन पुलिस ने कारोबारी कनगाराज के स्वामित्व वाली एक वित्तीय कंपनी पर छापा मारा। तलाशी के बाद पुलिस ने कंपनी के कार्यालय को सील कर दिया।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनका संबंध कथित विधायक खरीद-फरोख्त की साजिश से हो सकता है। हालांकि, इन दस्तावेजों की प्रकृति या उनकी साक्ष्यात्मक अहमियत को लेकर अधिकारियों ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। फिलहाल इनकी विस्तार से जांच की जा रही है ताकि कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
इसी क्रम में ईडी के छह अधिकारियों की टीम करूर पहुंचकर उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित धन का लेनदेन धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के दायरे में आता है या नहीं।
सूत्रों का कहना है कि ईडी जल्द ही करूर में उन कई कार्यालयों और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर भी तलाशी अभियान चला सकती है, जिनका संबंध इस कथित ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ मामले के आरोपियों से बताया जा रहा है। जांच एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन और अन्य अभिलेखों की जांच कर यह पता लगाएगी कि अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल या लेनदेन व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से किया गया या नहीं।
हालांकि, तमिलनाडु पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय ने प्रस्तावित तलाशी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिर भी करूर में ईडी अधिकारियों के पहुंचने को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
