नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनरेशन-ज़ेड (Gen Z) का दिल जीतने के लिए मोबाइल कैमरे का नहीं, बल्कि दिल का एंगल बदलने की जरूरत है।
सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा, “आप प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटा सकते हैं, लेकिन उनके सवालों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”
प्रियंका गांधी ने सरकार से अपनी नीयत सुधारने और खोई हुई विश्वसनीयता वापस हासिल करने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में व्यापक बदलाव, विशेषज्ञों की भागीदारी, रोजगार सृजन और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की मांग करते हुए कहा कि केवल विशेषज्ञ समितियां गठित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
इससे पहले नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रह्लाद जोशी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उनसे अपने दावों के समर्थन में प्रमाण देने की मांग की।
जोशी ने प्रियंका गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए उनकी टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि वह अपने दावों का प्रमाण देंगी। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें केवल विधेयक तक सीमित रहने की सलाह दी।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार 2024 में भी इसी तरह का कानून लेकर आई थी, लेकिन अब तक एक भी आरोपी को सजा नहीं मिल सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि “फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल छात्रों के खिलाफ किया जा रहा है, लेकिन पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ अब तक इस तकनीक का उपयोग नहीं हुआ।”
उन्होंने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली सरकारी समिति के सदस्यों की पात्रता पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश और घायल छात्रों के अभिभावक जानना चाहते हैं कि परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल की मंजूरी किसने दी। उन्होंने इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रियंका गांधी ने कहा, “छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ चुका है। योग्यता पर पैसे का असर हावी हो गया है। छात्र चाहते हैं कि उनके भविष्य को खतरे में डालने वाली व्यवस्था में सुधार हो।”
उन्होंने कहा कि छात्रों ने केवल जवाबदेही तय करने और गड़बड़ियों के जिम्मेदार लोगों को हटाने की मांग की थी, लेकिन उन्हें बल प्रयोग का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि “पिछले एक दशक में 152 पेपर लीक की घटनाओं से 750 करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए, लेकिन एक भी पेपर लीक माफिया को सजा नहीं मिली।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों को कमजोर किया है।
युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस और बड़े कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि केवल जनसंपर्क (पीआर) और नैरेटिव बदलने से काम नहीं चलेगा। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ ही दिनों बाद संसद परिसर में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर भी सवाल उठाए।
प्रियंका गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुई एक छात्रा की मां का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने किसी की मदद लेने से इनकार किया और अकेले लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।
उन्होंने सरकार से पूछा, “क्या छात्र आतंकवादी हैं? छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों पड़ी? कांग्रेस और पूरा देश जानना चाहता है कि छात्रों के खिलाफ इन हथियारों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया?”
–आईएएनएस
