कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: हर भारतीय पदक पूरे दल को प्रेरित करता है- पीटी उषा

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा का मानना है कि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल के बढ़ते पदक अभियान से पूरे दल में आत्मविश्वास की लहर पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि ग्लासगो में मिली हर सफलता अभी प्रतियोगिता में उतरने वाले खिलाड़ियों को प्रेरणा दे रही है।

पीटी उषा ने आईओए की ओर से जारी बयान में कहा, “बहु-खेल प्रतियोगिताओं की यही सबसे खूबसूरत बात होती है। आप देखते हैं कि एक भारोत्तोलक किसी तैराक के प्रदर्शन का जश्न मना रहा है, एक मुक्केबाज किसी अन्य खिलाड़ी का उत्साह बढ़ा रहा है या लॉन बाउल्स खिलाड़ी किसी दूसरे खेल के एथलीट को बधाई दे रहा है। वे अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेते हैं, लेकिन उनकी जर्सी एक है और वे एक ही देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही भावना एक विशेष जुड़ाव पैदा करती है।”

अपने खिलाड़ी जीवन के अनुभव को याद करते हुए दिग्गज धाविका ने कहा कि भारतीय शिविर में मौजूद सामूहिक भावना टीम की सबसे बड़ी ताकत बन गई है।

उन्होंने कहा, “मैं खुद एक एथलीट रही हूं और जानती हूं कि अपने साथियों का समर्थन कितना मायने रखता है। अब तक जीते गए पदकों का जश्न पूरे दल ने मनाया है। यह साझा गर्व की भावना उन खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देती है, जो अभी अपनी स्पर्धाओं में उतरने वाले हैं। यह सभी को याद दिलाता है कि हम यहां व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि टीम इंडिया के रूप में मौजूद हैं।”

ग्लासगो में भारत के प्रदर्शन ने कई खेलों में गति पकड़ी है। टीम ने शुरुआत पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक जीतकर की, जिसके बाद भारोत्तोलन में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू ने एक बार फिर भारत का नेतृत्व करते हुए स्वर्ण पदक जीता। वहीं ज्ञानेश्वरी देवी और बिंदियारानी देवी ने भी पोडियम पर जगह बनाकर भारत को कॉमनवेल्थ के शीर्ष भारोत्तोलन देशों में बनाए रखा।

भारोत्तोलन के अलावा भारतीय पैरा एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शॉट पुट में स्वर्ण और कांस्य पदक जीते। वहीं सर्वेश कुशारे ने कठिन परिस्थितियों के बीच पुरुषों की ऊंची कूद में रजत पदक हासिल किया।

इन सफलताओं का असर एथलेटिक्स दल के आत्मविश्वास में भी साफ दिखाई दे रहा है। नीरज चोपड़ा, मुरली श्रीशंकर और तेजस्विन शंकर जैसे खिलाड़ी अब अपनी व्यक्तिगत स्पर्धाओं की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों का मानना है कि हर पदक इस विश्वास को मजबूत कर रहा है कि बेहतर तैयारी और संयम के साथ कॉमनवेल्थ खेलों जैसे बड़े मंच पर पोडियम तक पहुंचा जा सकता है।

मुक्केबाजी दल में भी इसी तरह का माहौल देखने को मिल रहा है, जहां ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन पूरी मेहनत और पेशेवर अंदाज में अपनी तैयारियों में जुटी हैं। वहीं युवा मुक्केबाज जैसे जदुमणि सिंह और प्रीति अनुभवी खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण लेकर तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास हासिल कर रहे हैं।

भारतीय दल में एकजुटता की भावना लगातार मजबूत हो रही है। पैरा एथलीट हों या अन्य खिलाड़ी, सभी एक-दूसरे की सफलता का उत्साहपूर्वक जश्न मना रहे हैं। कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, डॉक्टर और सहयोगी स्टाफ भी अलग-अलग स्थलों पर पहुंचकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।

इस माहौल ने यह विश्वास मजबूत किया है कि हर पदक किसी एक खिलाड़ी या एक खेल का नहीं, बल्कि पूरे भारतीय दल की उपलब्धि है।

कॉमनवेल्थ गेम्स के अंतिम चरण में भारत की नजरें बड़ी संख्या में पदक जीतने पर हैं। हालांकि, पदकों और रिकॉर्ड के अलावा टीम का मानना है कि खिलाड़ियों के बीच एक-दूसरे से आगे बढ़ता आत्मविश्वास ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

–आईएएनएस

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