नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमावर्ती क्षेत्र और सतर्क समाज मिलकर ही देश को सुरक्षित बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज़ कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
नई दिल्ली में आयोजित सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार देश को पूरी तरह घुसपैठ-मुक्त बनाने के लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था विकसित कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से बुनियादी ढांचे का चार गुना विस्तार किया है।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा पर 1,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा की फेंसिंग लगभग 31 हजार करोड़ रुपये की लागत से की जा रही है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की जानकारी जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक समय पर पहुंचाने पर भी जोर दिया।
अमित शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रॉक्सी युद्ध, अवैध घुसपैठ, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, ड्रोन से जुड़े खतरों तथा जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और रहने योग्य बनाया जा रहा है।
सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर राज्यों सहित विभिन्न सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करना, संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करना तथा देश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना था। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा कुछ माह पहले विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की समीक्षा और उनके कारणों की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के गठन के बाद आयोजित की गई।
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