नई दिल्ली, 25 जून : सर्वोच्च न्यायालय ने आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को आश्वासन दिया कि मामले को उचित समय पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष कहा कि उनकी याचिका महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए मामले को तत्काल सूचीबद्ध कराने तक सीमित है। याचिका में अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित करने की मांग की गई है। इसमें ट्रस्ट द्वारा प्राप्त दान गहन जांच और मंदिर निधि प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता की भी मांग की गई है।
याचिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की चल रही जांच का संदर्भ दिया गया है। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि मामला केवल दान के प्रशासन से संबंधित है और धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप की मांग नहीं करता है।
इस बीच, लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने हाल ही में राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। मंदिर के धन के कथित गबन की विस्तृत जांच अब भी जारी है।
