नई दिल्ली, 24 जून : वित्तमंत्री निर्मला सीतारामण ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने, विकास की गति को तेज़ करने और समावेशी विकास के लिए सभी पक्षों से और अधिक सहयोग ज़रूरी है। उन्होंने यह बात कल नई दिल्ली में ग्लोबल कन्वर्जेंस फॉर ग्रोथ सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित में कही। श्रीमती सीतारामण ने कहा कि मौजूदा दुनिया में समृद्धि और चुनौतियाँ तो साझा हैं, लेकिन संघर्षों और अनिश्चितता का असर विकासशील और पिछड़े देशों पर अधिक पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए साझा वैश्विक कार्रवाई ज़रूरी है।
श्रीमती सीतारामण ने कहा कि सभी देशों की घरेलू ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं और लगातार बने रहने वाले वैश्विक असंतुलन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की विकास दर मुख्य रूप से घरेलू मांग के कारण है। उन्होंने कहा कि भारत, दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है और मध्यम अवधि में इसके जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद की विकास-दर लगभग सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में विकसित और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों ने हिस्सा लिया। इनमे भारत, ब्राज़ील, चीन, केन्या, दक्षिण कोरिया जैसे जी-7 देशों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रतिनिधि शामिल थे।
