त्रिपुरा राज्य का सबसे प्राचीन और पूजनीय धार्मिक स्थल है त्रिपुरा सुंदरी मंदिर जिसे स्थानीय लोग माताबाड़ी कहते हैं। यह मंदिर गुमटी जिले के मुख्यालय उदयपुर में स्थित है और राज्य की राजधानी अगरतला से लगभग 55 किलोमीटर दूर है। इसे भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक माना जाता है।
इतिहास और स्थापत्य
- इस मंदिर का निर्माण महाराजा धन्य माणिक्य ने 1501 ईस्वी में कराया था।
- मंदिर का गर्भगृह चौकोर है और ऊपर शंकु आकार का गुंबद है।
- यहाँ देवी की दो प्रतिमाएँ हैं – त्रिपुरा सुंदरी (5 फीट ऊँची) और छोटमा (2 फीट ऊँची)।
- देवी को यहाँ ‘सरशी’ रूप में पूजा जाता है।
- मंदिर का आकार कछुए जैसा है, इसलिए इसे कूर्म पीठ भी कहा जाता है।
दीपावली मेला
हर वर्ष दीपावली के अवसर पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है। इस मेले में दो लाख से अधिक श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर का विशेष प्रसाद है पेडा (गाढ़े दूध से बना मिठाई) और लाल गुड़हल का फूल।
कल्याण सागर
- मंदिर के पूर्व में स्थित यह विशाल तालाब लगभग 6.4 एकड़ क्षेत्र में फैला है।
- यहाँ दुर्लभ प्रजाति के कछुए और अनेक जलचर पाए जाते हैं।
- श्रद्धालु ‘मूड़ी’ और बिस्कुट से कछुओं को खिलाते हैं।
- यहाँ मछली पकड़ना वर्जित है और इसे पवित्र माना जाता है।
कैसे पहुँचे
- हवाई मार्ग : अगरतला का एम.बी.बी. हवाई अड्डा मंदिर से 67 किमी दूर है।
- रेल मार्ग : उदयपुर रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 1 किमी दूर है।
- सड़क मार्ग : अगरतला से बस, टैक्सी और पर्यटक कोच द्वारा लगभग डेढ़ घंटे में पहुँचा जा सकता है।
स्थानीय परिवहन
अगरतला हवाई अड्डे से पर्यटन विभाग द्वारा टैक्सी और बस की सुविधा उपलब्ध है।
ठहरने की व्यवस्था
| होटल/लॉज | पता | संपर्क |
| गुमटी यात्री निवास | अस्पताल रोड, उदयपुर | 03821-267939 |
| गुणाबती टूरिस्ट लॉज | माताबाड़ी, उदयपुर | 8794048572 |
| रॉयल इन | रमेश चौमोहनी, उदयपुर | 9856042427 |
| गौरी होटल व गेस्ट हाउस | सेंट्रल रोड, उदयपुर | 9862171764 |
| जॉयगोबिंदा होटल व गेस्ट हाउस | माताबाड़ी, उदयपुर | 9862760499, 9862480105 |
भोजन की व्यवस्था
- आतिथि फास्ट फूड, न्यू टाउन रोड
- गौरी होटल, सेंट्रल रोड
- रंगमाती कैफेटेरिया, जमतली
- सागर कैफेटेरिया, माताबाड़ी
- पुरबाशा एम्पोरियम, माताबाड़ी
आसपास के दर्शनीय स्थल
- भुवनेश्वरी मंदिर
- तेपनिया इको पार्क
- गुणाबती समूह मंदिर
- जगन्नाथ मंदिर
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है। यहाँ की यात्रा श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करती है।
जानकारी का सोर्स: टूरिज्म डिपार्टमेंट, त्रिपुरा सरकार
