नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस): रूस की सेना में शामिल 139 भारतीय नागरिकों को अब तक मुक्त कराया जा चुका है और वहां अब भी मौजूद करीब दो दर्जन भारतीयों की जल्द रिहाई के लिए रूस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। यह जानकारी शुक्रवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) ने दी।
साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “रूसी सेना में मौजूद शेष भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए हम रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। हमारे प्रयासों से अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रिहा कराया जा चुका है। वहां मौजूद बाकी करीब दो दर्जन भारतीयों की रिहाई के लिए भी हम सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं।”
उन्होंने एक बार फिर भारतीय नागरिकों को जोखिम भरे रोजगार प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि संदिग्ध व्यक्तियों या एजेंसियों द्वारा दिए जाने वाले आकर्षक नौकरी के प्रस्तावों के झांसे में न आएं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुल 202 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हुए थे। भारत सरकार के लगातार प्रयासों से इनमें से कई लोगों को समय से पहले सेवा से मुक्त करा लिया गया है। हालांकि, रूसी अधिकारियों के अनुसार दो दर्जन से अधिक भारतीयों की मौत हो चुकी है और कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल नहीं होने की कड़ी सलाह जारी की थी। यह परामर्श उन खबरों के बाद जारी किया गया था, जिनमें दावा किया गया था कि नौकरी की तलाश में रूस गए कई भारतीयों को यूक्रेन युद्ध में लड़ाई के मोर्चे पर भेजा जा रहा है।
एक समाचार पत्र की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र में मौजूद दो भारतीयों ने बताया था कि उन्हें निर्माण कार्य में नौकरी का झांसा देकर रूस ले जाया गया, लेकिन बाद में सीधे युद्ध के मोर्चे पर तैनात कर दिया गया। उनका यह भी आरोप था कि इसी तरह की परिस्थितियों में कम से कम 13 अन्य भारतीय भी वहां फंसे हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों भारतीय पिछले छह महीनों के दौरान छात्र या पर्यटक वीजा पर रूस गए थे। उनका आरोप था कि निर्माण क्षेत्र में नौकरी का वादा करने वाले एक एजेंट ने उन्हें धोखे से सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया।
