मुंबई, 25 जुलाई (आईएएनएस): भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन ने सफलतापूर्वक 1,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत की है। रेलवे मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, 10 कोच वाली यह स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से ट्रेन के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) उत्सर्जित होती है, जिससे धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसे वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रणोदन (प्रोपल्शन) तकनीक माना जा रहा है।
ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कारें हैं, जो कुल 2,400 किलोवाट क्षमता प्रदान करती हैं। इन्हें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों और हाइड्रोजन सिलेंडरों का सहयोग प्राप्त है।
इस परियोजना में ग्रीन हाइड्रोजन को 500 बार तक के दबाव पर संग्रहित किया गया है और 350 बार के दबाव पर इसकी आपूर्ति की जाती है। कुल मिलाकर लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन भंडारण की व्यवस्था की गई है।
रेलवे मंत्रालय ने बताया कि ट्रेन में सुरक्षा के लिए कई स्वतंत्र प्रणालियां लगाई गई हैं, जो गैस रिसाव, अत्यधिक तापमान, आग और धुएं का तुरंत पता लगाती हैं। इसके साथ ही स्वचालित शटडाउन प्रणाली, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षणों का पालन किया गया है।
जिंद और सोनीपत के बीच सफल संचालन के बाद अब इस हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण दिल्ली मार्ग पर जल्द शुरू किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह परियोजना भारत में स्वदेशी हाइड्रोजन रेल पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह सतत और शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भविष्य में स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करेगी।
ट्रेन के शुभारंभ के बाद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आईएएनएस से कहा कि भारत ने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी) अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जिससे भविष्य में इस तकनीक के निर्यात का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा, “हाइड्रोजन भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भविष्य का महत्वपूर्ण ईंधन बनकर उभर रहा है। भारतीय रेलवे ने इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं।”
वैष्णव ने कहा, “रेलवे ने परिवहन क्षेत्र के लिए पूरी तरह स्वदेशी 2,400 किलोवाट क्षमता वाली हाइड्रोजन प्रोपल्शन प्रणाली विकसित की है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है। यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करती है।”
