नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस): कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बताया और कहा कि उन्हें देश की जेन-ज़ी पीढ़ी पर गर्व है, जिसने परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण और लगातार आंदोलन कर यह बदलाव संभव किया।
अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में थरूर ने “युवा भारत और युवा दिल वालों” को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा, “जब नागरिक शांतिपूर्वक और लगातार अपनी आवाज उठाते हैं, तो सरकारें उदासीन नहीं रह सकतीं। आज बात केवल एक मंत्री की नहीं है, बल्कि पूरे युवा भारत और जेन-ज़ी की है। मुझे आप सभी पर गर्व है।”
युवाओं की सराहना करते हुए थरूर ने कहा, “आपने अपनी निराशा को कार्रवाई में बदला। आपने अपने गुस्से का सामना साहस, रचनात्मकता और दृढ़ विश्वास के साथ किया। आपने चुप रहने से इनकार किया और पूरे देश को याद दिलाया कि लोकतंत्र सिर्फ सरकार चलाने वालों का नहीं, बल्कि सरकार से जवाबदेही मांगने वालों का भी है।”
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा, “मुद्दे उठाते रहिए, बेबाक बने रहिए, असहज सवाल पूछते रहिए, पाखंड को उजागर करते रहिए और सबसे महत्वपूर्ण, लोकतांत्रिक भागीदारी जारी रखिए।”
हालांकि, थरूर ने यह भी कहा कि केवल एक इस्तीफा उन करोड़ों युवाओं की चिंता, अनिश्चितता और कठिनाइयों को समाप्त नहीं कर सकता, जिनका सामना उन्हें करना पड़ा है।
उन्होंने कहा, “केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास बहाल नहीं कर सकता। इसके लिए पारदर्शी जांच, दोषियों की जवाबदेही तय करना और ऐसे व्यापक सुधार आवश्यक हैं, जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।”
छात्रों को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, “आपकी आवाज मायने रखती है, आपका साहस मायने रखता है। आपने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत किया है। जेन-ज़ी, इसी तरह आगे बढ़ते रहिए और विश्वास रखिए कि आपकी आवाज भारत को बदल सकती है। आज आपने इसे साबित कर दिया है।”
उन्होंने कहा कि यह “सुधारों की सिर्फ शुरुआत” है।
एक अन्य पोस्ट में थरूर ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस बात की स्वीकारोक्ति है कि लोकतंत्र में जवाबदेही से अनिश्चितकाल तक बचा नहीं जा सकता।
उन्होंने लिखा, “यह फैसला उन छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों की कई सप्ताह तक चली शांतिपूर्ण और दृढ़ आवाजों के बाद आया है, जिन्होंने खुद को अनदेखा नहीं होने दिया। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने पर कई युवाओं को पुलिस बल और हिंसा का सामना करना पड़ा, जो राजनीतिक विचारधारा से परे हर नागरिक के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।”
उधर, छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को केंद्र सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे अपने धरने को समाप्त करने की घोषणा कर दी।
