गुवाहाटी, 25 जुलाई (आईएएनएस): असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान और असम के प्रति उनके अटूट समर्थन को हमेशा याद रखा जाएगा।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री सरमा ने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान के प्रति अपनी कृतज्ञता को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को लागू करने और भारत की शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर उसकी सभ्यतागत आत्मा को पुनर्स्थापित करने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका ऐतिहासिक रही है।
मुख्यमंत्री ने लिखा, “केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की सभ्यतागत चेतना को पुनर्जीवित करने और हमारी शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्त करने के लिए अथक प्रयास किए। राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता राष्ट्र निर्माण में उनके सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक के रूप में याद की जाएगी।”
धर्मेंद्र प्रधान के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए सरमा ने कहा कि जब भी असम को उनकी आवश्यकता पड़ी, उन्होंने हमेशा राज्य का साथ दिया।
उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं असम के प्रति उनके स्नेह से हमेशा प्रभावित रहा हूं। जब भी असम को उनके सहयोग की जरूरत पड़ी, वे हमारे साथ मजबूती से खड़े रहे। उनका प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और सद्भावना मेरे लिए हमेशा बहुत मायने रखती रही है।”
मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) गुवाहाटी के उद्घाटन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि धर्मेंद्र प्रधान की दूरदृष्टि और देशभर में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है।
सरमा ने धर्मेंद्र प्रधान को उनकी “समर्पित सेवा, विनम्रता और निस्वार्थ योगदान” के लिए धन्यवाद देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि धर्मेंद्र प्रधान भविष्य में भी जिस भी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे, उसी समर्पण के साथ देश की सेवा करते रहेंगे।
