रथ तैयार, कड़ी सुरक्षा के बीच सजा पुरी; गुरुवार से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा

भुवनेश्वर, 15 जुलाई (आईएएनएस): ओडिशा का पवित्र शहर पुरी विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है। गुरुवार (16 जुलाई) को 12वीं शताब्दी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपनी नौ दिवसीय वार्षिक गुंडिचा यात्रा पर निकलेंगे। इस अवसर पर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं।

बुधवार को अंतिम तैयारियों के तहत पारंपरिक रथखला से तीनों देवताओं के रथों को विधिवत श्रीजगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के निकट लाया जा रहा है। गुरुवार को लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तलध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथों को लगभग तीन किलोमीटर तक खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक ले जाएंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुंडिचा मंदिर चतुर्धा मूर्ति—भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन—का जन्मस्थल माना जाता है। रथयात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने व्यापक तैयारियां की हैं।

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी ने बताया कि रथयात्रा की सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 14 दिनों के अनसर (एकांतवास) के बाद भगवानों के प्रथम दर्शन के लिए आयोजित नेत्रोत्सव और नवयौवन दर्शन की रस्में मंगलवार को निर्धारित समय पर संपन्न हुईं। बुधवार के सभी धार्मिक अनुष्ठान भी तय कार्यक्रम के अनुसार जारी हैं।

उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह 9 बजे से 9:30 बजे के बीच पहांडी बीजे अनुष्ठान शुरू होगा। इसी अनुष्ठान के दौरान भगवान मंदिर से बाहर निकलकर रथों पर विराजमान होंगे और गुंडिचा मंदिर की ओर अपनी यात्रा आरंभ करेंगे।

पुरी के जिलाधिकारी दिव्य ज्योति परिड़ा ने बताया कि इस वर्ष रथयात्रा के लिए भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

रथयात्रा को लेकर पुरी जिला पुलिस ने विशेष यातायात योजना भी लागू की है। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए 595 स्थायी और 1,050 अस्थायी संकेतक लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 12,000 पुलिसकर्मियों के साथ पर्याप्त संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान तैनात रहेंगे।

समुद्री मार्ग से किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना भी सतर्क रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखने के लिए 473 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि महत्वपूर्ण सूचनाएं ओड़िया, हिंदी और अंग्रेजी में प्रसारित करने के लिए 65 बड़े एलईडी स्क्रीन स्थापित किए गए हैं। संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 16 स्थायी मोबाइल टावरों के साथ कई अस्थायी टावर भी लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं तक आवश्यक जानकारी पहुंचाने के लिए बल्क एसएमएस सेवा का भी उपयोग किया जाएगा।

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