15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता, सस्ते होंगे ब्रिटिश उत्पाद, भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस): भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई, बुधवार से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत में कई ब्रिटिश उत्पाद सस्ते होने की संभावना है। वहीं, भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।

समझौते के तहत 15 जुलाई से स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स सहित कई ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम होना शुरू हो जाएगा। हालांकि, कुछ उत्पादों पर शुल्क में कटौती आने वाले वर्षों में क्रमिक रूप से लागू की जाएगी।

दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन की लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे भारत के लगभग पूरे निर्यात मूल्य को फायदा होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, वस्त्र, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, खेल सामग्री और खिलौना उद्योग इस समझौते से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। इसके अलावा इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट और जैव-रसायन उद्योग के लिए भी ब्रिटेन के बाजार तक पहुंच आसान होगी।

इस समझौते के तहत किन उत्पादों को शुल्क रियायत मिलेगी और निर्यातकों तथा आयातकों को किन नियमों का पालन करना होगा, इस संबंध में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश और नवाचार के सहयोग को नई ऊंचाई देगा तथा कारोबार और पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत से ब्रिटेन की कंपनियों के साथ और अधिक निकटता से काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसानों, मछुआरों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजार में नए अवसर मिलेंगे। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेहतर गुणवत्ता वाले विदेशी उत्पाद उपलब्ध होंगे। महिला उद्यमियों, युवाओं, स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भी यह समझौता नए अवसरों के द्वार खोलेगा।

उल्लेखनीय है कि 14 दौर की वार्ताओं के बाद 24 जुलाई 2025 को भारत और ब्रिटेन के बीच इस सीईटीए पर हस्ताक्षर किए गए थे। 30 अध्यायों वाले इस समझौते में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा, नवाचार, सतत विकास तथा सरकारी खरीद सहित कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

समझौते के अनुसार भारत 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा, जिनमें से 85 प्रतिशत उत्पाद अगले 10 वर्षों में पूरी तरह शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150 प्रतिशत आयात शुल्क पहले घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और अगले 10 वर्षों में इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। ब्रिटिश कारों पर शुल्क भी निर्धारित कोटा व्यवस्था के तहत चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।

इसके अलावा, ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत पात्र भारतीय पेशेवरों को डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन का लाभ मिलेगा। इसके तहत उन्हें निर्धारित अवधि तक दोनों देशों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में एक साथ अंशदान नहीं करना पड़ेगा।

–आईएएनएस

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