15 जुलाई तक वॉयस सैंपल दें, नहीं तो जबरन पुलिस कार्रवाई से मिली राहत वापस होगी: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को दी चेतावनी

कोलकाता, 10 जुलाई : कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक बिधाननगर अदालत में उपस्थित होकर सीआईडी को अपना वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि वह तय समय पर ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ जबरन पुलिस कार्रवाई से मिली अंतरिम राहत वापस ले ली जाएगी।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने निर्देश दिया कि अभिषेक बनर्जी 15 जुलाई को उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी को अपना वॉयस सैंपल दें।

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अभिषेक बनर्जी निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं करते हैं और अदालत में उपस्थित होकर वॉयस सैंपल नहीं देते हैं, तो इस मामले में उन्हें जबरन पुलिस कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, से मिली हाईकोर्ट की अंतरिम सुरक्षा समाप्त कर दी जाएगी।

अभिषेक बनर्जी पर हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान एक जनसभा में कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाला बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री को धमकी देने का आरोप है। इसी मामले की जांच के तहत सीआईडी उनके वॉयस सैंपल लेना चाहती है।

गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी इससे पहले भी बिधाननगर अदालत में वॉयस सैंपल देने के लिए दो बार निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए थे। आखिरी बार 8 जुलाई को सीआईडी अधिकारी करीब दो घंटे तक अदालत में उनके आने का इंतजार करते रहे, लेकिन वह नहीं पहुंचे।

शुक्रवार को वॉयस सैंपल देने से छूट संबंधी उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वह 8 जुलाई को भी अदालत में पेश नहीं हुए थे। इसके बाद न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें अंतिम अवसर दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि 15 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक अदालत में उपस्थित होकर वॉयस सैंपल देने के निर्देश का उल्लंघन किया गया, तो उन पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अदालत के सख्त रुख के बाद अभिषेक बनर्जी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल अदालत के निर्देशों का पालन करेंगे और तय तारीख एवं समय पर बिधाननगर अदालत में उपस्थित होकर वॉयस सैंपल देंगे।

साथ ही, बचाव पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि अदालत में पेशी के दौरान उनके मुवक्किल के साथ किसी प्रकार की शारीरिक प्रताड़ना या दुर्व्यवहार न हो। इस पर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि पेशी के दिन अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस की होगी।

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