हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद पर देशभर में दलित-आदिवासी स्वाभिमान अभियान चलाएगी कांग्रेस : मल्लू रवि

नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण के मामले को लेकर देशभर में दलित-आदिवासी स्वाभिमान अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एससी-एसटी जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर राज्यों में बैठकें करेंगे और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार से बात करते हुए मल्लू रवि ने मंगलवार को कहा कि हल्द्वानी की घटना को पार्टी ने केवल मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान नहीं, बल्कि पूरे एससी-एसटी समुदाय के सम्मान से जुड़ा विषय माना है। 8 सितंबर को करीब 22 सांसद संसद मार्ग थाने पहुंचे थे और शून्य प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस अधिकारियों ने शून्य प्राथमिकी दर्ज नहीं की और करीब साढ़े तीन घंटे तक सांसदों ने थाने में विरोध किया। बाद में हल्द्वानी में पहले से दर्ज प्राथमिकी की जानकारी दी गई। केवल प्राथमिकी दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, आरोपितों के खिलाफ जांच और कार्रवाई भी होनी चाहिए।

मल्लू रवि ने कहा कि 29 सितंबर की दलित-आदिवासी स्वाभिमान बैठक में कांग्रेस के सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों और कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्रियों के साथ पार्टी के एससी-एसटी विभागों के पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। बैठक में सर्वसम्मति से खरगे के साथ खड़े रहने का प्रस्ताव पारित करने और हल्द्वानी मामले में जांच व कार्रवाई की मांग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में इसी तरह की बैठकें आयोजित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी अन्य समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि संविधान के तहत न्याय, समान सम्मान, गरिमा, स्वतंत्रता और समानता के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष है। बैठक में आगे की रणनीति सांसदों, विधायकों, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों और मंत्रियों की राय के आधार पर तय की जाएगी। उन्होंने नवंबर के अंतिम सप्ताह में तालकटोरा स्टेडियम में एक बड़ी बैठक आयोजित किए जाने की संभावना भी जताई।

हल्द्वानी में हुए कथित शुद्धिकरण को स्थानीय धार्मिक परंपरा से जुड़ा बताए जाने पर रवि ने कहा कि रामलीला मैदानों का इस्तेमाल सभी राजनीतिक दलों की सभाओं के लिए होता है और वहां राजनीतिक भाषण भी होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना को केवल स्थानीय धार्मिक अनुष्ठान बताकर मामले की गंभीरता को कम नहीं किया जा सकता। हालांकि, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि हल्द्वानी में किया गया हवन किसी व्यक्ति या जाति के खिलाफ नहीं था।

राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के सवाल पर मल्लू रवि ने कहा कि कांग्रेस इसे हटाने और रद्द करने की मांग करेगी। राहुल गांधी केवल मामले में न्याय और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर रवि ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है और चाहती है कि इसे परिसीमन से अलग कर लागू किया जाए। एससी, एसटी और पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को भी महिला आरक्षण में उनका हिस्सा मिलना चाहिए।

परिसीमन को लेकर उन्होंने दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि केवल आबादी के आधार पर सीटों में बदलाव से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है, जिन्होंने परिवार नियोजन को प्रभावी तरीके से लागू किया है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन के बाद राज्यों के बीच वर्तमान सीट अंतर में अत्यधिक बदलाव नहीं होना चाहिए। साथ ही केंद्र से वित्तीय संसाधनों, बजट और अधिकारों का लोकतांत्रिक तरीके से समान वितरण सुनिश्चित करने की मांग की।

एक देश, एक चुनाव के प्रस्ताव पर मल्लू रवि ने कहा कि कांग्रेस इसका विरोध करेगी। संघीय व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परिस्थितियों के कारण सरकारें अलग समय पर गिर सकती हैं और ऐसे में चुनाव भी अलग समय पर हो सकते हैं। उनके अनुसार, किसी भी व्यवस्था को संसदीय लोकतंत्र के अनुरूप होना चाहिए।

निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) पर रवि ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे संसद सत्र के दौरान प्रधानमंत्री या गृहमंत्री से इस पर स्पष्टीकरण की मांग की, लेकिन जवाब नहीं मिला। उन्होंने निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई खबरों का हवाला देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि एसआईआर के जरिए विपक्ष समर्थक मतदाताओं को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए मतदाताओं की राजनीतिक पसंद की पहचान कर विपक्ष समर्थक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

जाति जनगणना और आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा हटाने के सवाल पर मल्लू रवि ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से संघर्ष जारी रखेगी। तेलंगाना विधानसभा में जाति सर्वेक्षण से संबंधित प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। जाति जनगणना में पिछड़े वर्गों की विभिन्न श्रेणियों, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सहित अन्य सामाजिक-आर्थिक मानकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से आंकड़े जुटाने की जरूरत बताई।

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