स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ का जलावतरण, गहरे समुद्र में भारत की अनुसंधान क्षमता होगी मजबूत

कोलकाता, 09 सितंबर (हि.स.)। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बुधवार को स्वदेशी समुद्री अनुसंधान पोत ‘सागर मंथन’ का जलावतरण किया। राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए करीब 840 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे इस अत्याधुनिक पोत से गहरे समुद्र में भारत की अनुसंधान, सर्वेक्षण और खोज क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

जीआरएसई के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में आयोजित जलावतरण समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्मला समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने पोत के जलावतरण और नामकरण पर जीआरएसई तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को बधाई दी।

जीआरएसई के प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि ने बताया कि कील बिछाए जाने के करीब पांच महीने बाद ही पोत का जलावतरण किया गया है। उन्होंने इसे शिपयार्ड की निर्माण क्षमता और निर्धारित समय से पहले काम पूरा करने की क्षमता का प्रमाण बताया। पोत के वर्ष 2028 की शुरुआत तक उपयोग के लिए तैयार होने की उम्मीद है।

89.5 मीटर लंबे और 18.8 मीटर चौड़े ‘सागर मंथन’ का कुल भार करीब 5,900 टन होगा। यह अधिकतम निरंतर क्षमता के 90 प्रतिशत पर 14 समुद्री मील की गति से चल सकेगा। इसे कठिन समुद्री परिस्थितियों में लंबे समय तक अनुसंधान कार्य करने के लिए तैयार किया गया है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव ने कहा कि पोत गहरे समुद्र में समुद्र विज्ञान और भूभौतिकीय अनुसंधान के लिए भारत को उन्नत क्षमता प्रदान करेगा। इससे भूमध्यरेखीय हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी महासागर के साथ अंटार्कटिका के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में भी अनुसंधान किया जा सकेगा।

पोत में समुद्र तल के नीचे की संरचना के अध्ययन के लिए अत्याधुनिक उपकरण, भूकंपीय उपकरण और आधुनिक समुद्र विज्ञान यंत्र लगाए जाएंगे। वातावरण संबंधी अध्ययन के लिए उन्नत डॉप्लर मौसम रडार भी उपलब्ध होगा। यह स्वायत्त पानी के भीतर चलने वाले वाहनों (एयूवी) और दूर से संचालित पानी के भीतर चलने वाले वाहनों (आरओवी) को समुद्र में उतारने और वापस लाने में सक्षम होगा। इन उपकरणों को राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान विकसित कर रहा है।

जीआरएसई के अनुसार, ‘सागर मंथन’ छह किलोमीटर तक की गहराई में बहु-किरण सोनार और भूभौतिकीय भूकंपीय सर्वेक्षण कर सकेगा। इसके जरिए तापमान, लवणता और समुद्र की गहराई का अध्ययन, पानी के नमूने लेने तथा जैविक नमूने एकत्र करने की सुविधा भी होगी।

पोत में समुद्र तल से नमूने लेने, चट्टानों के नमूने निकालने तथा समुद्र में निगरानी एवं आंकड़ा संग्रहण उपकरण स्थापित करने की सुविधाएं होंगी। वैज्ञानिक पोत पर ही नमूनों का प्राथमिक विश्लेषण और आंकड़ों का प्रसंस्करण कर सकेंगे। वैज्ञानिकों और तकनीशियनों के प्रशिक्षण तथा शिक्षा के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ‘सागर मंथन’ हिंद महासागर क्षेत्र में मैंगनीज नोड्यूल और बहुधात्विक सल्फाइड जैसे समुद्री खनिज संसाधनों की खोज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एनसीपीओआर के समन्वय में संचालित होने वाला यह पोत भारत के समुद्री अनुसंधान बेड़े की क्षमता बढ़ाने के साथ समुद्री संसाधनों के वैज्ञानिक अध्ययन और सरकार की नीली अर्थव्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।-

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