‘विकसित वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के प्रतिभागियों से पीएम मोदी ने की बातचीत, अनुभव दूसरों के साथ साझा करने का किया आह्वान

नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के प्रतिभागियों से संवाद किया। इस कार्यक्रम में देश के 250 जिलों से 400 से अधिक युवाओं ने भाग लिया।

‘माई भारत’ के माध्यम से संचालित इस कार्यक्रम की परिकल्पना प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए की गई है, जिसके तहत सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव मानते हुए उन्हें ‘विकसित भारत’ की यात्रा का सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान दादरा और नगर हवेली की निवासी और कानून की छात्रा निकिता ने प्रधानमंत्री को बताया कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सीमावर्ती गांव चांगो तक पहुंचना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि रही। उन्होंने कहा कि वहां के ग्रामीणों ने उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह स्नेह और अपनापन दिया।

प्रधानमंत्री ने निकिता से पूछा कि क्या उन्हें चांगो में महिला पंचायत प्रतिनिधियों से मिलने का अवसर मिला। इस पर निकिता ने बताया कि वहां की महिला प्रधान खेती, प्रशासन और घरेलू जिम्मेदारियों सहित हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

प्रधानमंत्री ने उन्हें सुझाव दिया कि वे गांव के लोगों से वीडियो कॉल पर बात करें और अपने परिवार को भी उनसे जोड़ें। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब वहां 4जी नेटवर्क भी पहुंच गया होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “अकेले यात्रा करना दुनिया को जानने के साथ-साथ स्वयं को जानने का भी माध्यम है। आप सभी वहां अकेले गए थे, लेकिन लौटते समय एक परिवार बनकर आए होंगे।”

उन्होंने कहा, “आपकी यह एकल यात्रा भारत की बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है। हमारा प्रयास है कि देश का हर युवा और हर बेटी इसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े।”

राजस्थान के सीमावर्ती गांव से आए प्रतिभागी सुनील कुमार केला से प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के धार चांगो उपरला गांव की यात्रा का अनुभव पूछा।

सुनील ने कहा, “देशभक्ति और साहस वहां भी उतना ही था, जितना राजस्थान में देखने को मिलता है। वहां के लोग भी बेहद सरल और स्नेही थे।”

उन्होंने बताया कि राजस्थान के 50 डिग्री सेल्सियस तापमान से हिमाचल के शून्य डिग्री तापमान तक का बदलाव उनके लिए एक अनूठा अनुभव रहा।

प्रधानमंत्री के यह पूछने पर कि उन्होंने वहां क्या बदलाव देखा, सुनील ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद वहां की सड़कें राजस्थान की तुलना में बेहतर थीं।

उन्होंने बताया कि गांव में लोग सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का उपयोग कर रहे थे, जो ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के कारण संभव हो पाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान, हिमाचल प्रदेश या पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के युवा हों, सभी की सोच एक जैसी है।

उन्होंने कहा, “भौगोलिक रूप से ये गांव भले दूर दिखाई देते हों, लेकिन भावनात्मक रूप से वे देश से गहराई से जुड़े हैं। इसी सोच के साथ हमने सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव माना है। आजादी के बाद लंबे समय तक इन्हें देश का आखिरी गांव समझकर उपेक्षित रखा गया था।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “जो पहले प्राथमिकता में सबसे पीछे थे, वे अब सबसे आगे हैं।”

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की 21 वर्षीय प्रतिभागी सयंतिका ने बताया कि लद्दाख के मान गांव की यात्रा के दौरान ऊंचाई में अचानक बदलाव के कारण शुरुआत में उनकी तबीयत खराब हो गई थी।

उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों और वहां के चिकित्सकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने सैनिकों से पहले नागरिकों की देखभाल को प्राथमिकता दी।

सयंतिका ने यह भी बताया कि सीमावर्ती गांव में यूपीआई (UPI) की सुविधा उपलब्ध देखकर उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ।

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