पेरिस, 3 जुलाई: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी सतत, लचीले और नवाचार आधारित विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह सक्षम है। पेरिस में आयोजित भारत-फ्रांस बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति, आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण, ऊर्जा परिवर्तन और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है।
वित्त मंत्री ने फ्रांस के उद्योग जगत और निवेशकों को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में भारत की विकास यात्रा का भागीदार बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने साझा समृद्धि के लिए भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के वैश्विक इकोसिस्टम को आकार देने में भारत और फ्रांस विश्वसनीय साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय एआई, डिजिटल अवसंरचना और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो गया है। साथ ही भारत में कार्यरत लगभग एक हजार फ्रांसीसी कंपनियों की उपस्थिति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल भुगतान भारत में होते हैं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ती पहल अक्षय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, ऑफशोर विंड और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश के अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में उभरा है। जून 2026 तक यहां 1,200 से अधिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। इसके पास 111 अरब डॉलर की बैंकिंग परिसंपत्तियां और 176 अरब डॉलर के संचयी बैंकिंग लेनदेन हैं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग, फंड प्रबंधन, लीजिंग, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, पुनर्बीमा और सतत वित्त जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
