संविधान की रक्षा और मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग को लेकर अगरतला में INDIA गठबंधन की विरोध रैली

अगरतला, 30 अक्टूबर: संविधान की गरिमा की रक्षा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रद्द करने और प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर शुक्रवार को अगरतला में INDIA गठबंधन की त्रिपुरा इकाई ने विरोध रैली और सभा आयोजित की। इस कार्यक्रम में आठ राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने निर्वाचन आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर चिंता व्यक्त की।

सभा को संबोधित करते हुए त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और CPI(M) पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य माणिक सरकार ने कहा कि मतदान के अधिकार और संविधान की रक्षा के आंदोलन को भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

माणिक सरकार ने कहा कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए और सभी को स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि धर्म, जाति, समुदाय या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी नागरिक के मतदान के अधिकार को सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आगे रखकर केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के हितों की रक्षा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार सत्ता में बने रहने के उद्देश्य से अपने अनुकूल मतदाता सूची तैयार करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय, अनुसूचित जातियों, मजदूरों, किसानों, खेतिहर मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।

माणिक सरकार ने दावा किया कि अब तक देश में लगभग 13 करोड़ 40 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके छात्र-छात्राओं और युवाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने में भी बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

त्रिपुरा में चुनावी स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुए विभिन्न चुनावों में अनेक मतदाता स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट नहीं दे सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के संरक्षण में असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल कर लोगों के मतदान के अधिकार का हनन करने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले पांच वर्षों से त्रिपुरा में चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। अब यह आंदोलन देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के व्यापक संघर्ष से जुड़ गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए माणिक सरकार ने कहा कि केवल एक निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

इस दिन की रैली में विपक्ष के नेता और CPI(M) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देशभक्त और लोकतांत्रिक शक्तियों की एकता का प्रतीक है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने दलों के झंडों के बजाय राष्ट्रीय तिरंगा हाथ में लेकर रैली में शामिल हुए। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में लोकतांत्रिक शक्तियों की एकता पर जोर दिया।

निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए जितेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का उचित ढंग से निर्वहन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं है। आम नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करना और विपक्षी दलों के उम्मीदवारों की चुनाव में निर्बाध भागीदारी सुनिश्चित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले नगर निकाय और स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र प्राप्त करने और जमा करने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ा था।

कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग जैसी संस्थाओं का राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। SIR प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने दावा किया कि त्रिपुरा में मतदाता सूची से हटाने के लिए दो लाख से अधिक नाम चिह्नित किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव होगा।

सुदीप रॉय बर्मन ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को शामिल करते हुए निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की। संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों को मनमाने ढंग से सीमित नहीं किया जा सकता।

त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने कहा कि देश के लोगों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और संविधान के ढांचे में बदलाव करने के प्रयासों को खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र, भाषाई अधिकारों, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समानता की रक्षा के लिए INDIA गठबंधन एक साझा मंच के रूप में उभरा है।

आंदोलन में युवाओं और छात्र-छात्राओं की भागीदारी की सराहना करते हुए आशीष कुमार साहा ने कहा कि राजनीतिक भय और दमन के आरोपों के बावजूद आम लोगों की भागीदारी इस आंदोलन को महत्वपूर्ण बनाती है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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