Treatment : दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों का जल्द इलाज करवाए केंद्र सरकारः हाई कोर्ट

नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए दिल्ली के एम्स और देश के दूसरे केंद्रों में इलाज जल्द शुरू कराए। जस्टिस वी कामेश्वर राव ने केंद्र से कहा कि इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को ये सूचित किया गया कि इलाज कराने वाले बच्चों के परिजनों ने इलाज जल्द शुरू करने के लिए प्राधिकारों से संपर्क किया था लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है, खासकर दिल्ली के एम्स से। सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से वकील तनवीर ओबेराय ने कहा कि किस किस्म की बीमारी के लिए कौन सा इलाज और दवाइयां दी जाएं, इसके लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि एम्स में दुर्लभ बीमारियों के इलाज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष स्वीकृति के लिए रखा जाना है।

सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि हमें आश्चर्य है कि एम्स जैसा संस्थान अभी तक बीमारी की गंभीरता के बारे में ही विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के एक महीने से ज्यादा बीत गए हैं, उसके बावजूद अभी तक एम्स ने इलाज शुरू नहीं किया। तब कोर्ट ने कहा कि एम्स का जवाब संतोषजनक नहीं है। वो जल्द से जल्द इलाज शुरू कराए।

14 दिसंबर, 2021 को कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वो एम्स समेत देश के दूसरे केंद्रों को धन मुहैया कराए। जस्टिस रेखा पल्ली की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि ऐसे बच्चों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता है, क्योंकि केंद्र की योजना इन बच्चों के कल्याण के लिए ही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार ये कह रही है कि उसकी योजना दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए ही है। ऐसे में एम्स या दूसरे संस्थानों में जहां इन बीमारियों का इलाज होना है, उन्हें फंड की कमी नहीं होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने बताया था कि कई सार्वजनिक उपक्रम कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए फंड मुहैया करा रहे हैं। ये सार्वजनिक उपक्रम की ओर से दिया गया फंड 1200 करोड़ तक की है।

7 दिसंबर 2021 को कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई थी कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए आवंटित धन का पूरा उपयोग नहीं कर रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा था कि पिछले तीन सालों में दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए आवंटित 193 करोड़ रुपये धन का उपयोग नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार ये बता पाने में नाकाम रही है कि वो आवंटित धन का पूरा उपयोग क्यों नहीं कर सकी है। केंद्र केवल ये बता रही है कि उसने ये किया और वो किया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इससे बच्चों को क्या मिल रहा है, कुछ नहीं। कोर्ट ने कहा था कि हमारे आदेश के नौ महीने बीत गए लेकिन हम अभी चौराहे पर खड़े हैं।

4 अगस्त, 2021 को केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए आनलाइन क्राऊड फंडिंग का प्लेटफार्म लांच कर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से एएसजी चेतन शर्मा ने कहा था कि आनलाइन पोर्टल काम करने लगा है। इसका लिंक है- http://rarediseases.aardeesoft.com । उन्होंने कहा था कि सरकारी कंपनियों और निजी कारपोरेट से इस पोर्टल के जरिये धन देने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है। केंद्र सरकार के इस प्रयास की हाईकोर्ट ने सराहना करते हुए पोर्टल के व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया था।

14 जुलाई, 2021 को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए क्राऊड फंडिंग का प्लेटफार्म तत्काल लांच करें। 19 अप्रैल, 2021 को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि दुर्लभ बीमारियों के इलाजे के लिए नेशनल हेल्थ पॉलिसी फॉर रेयर डिसीजेस को 30 मार्च 2021 को नोटिफाई कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि अर्नेश शॉ नामक बच्चे ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने नेशनल कंसोर्टियम फॉर रिसर्च , डेवलपमेंट एंड थेराप्युटिक फॉर रेयर डिसीजेस नामक कमेटी का गठन करने और रेयर डिसीजेस फंड गठित करने का आदेश दिया था।