-‘कल्याण’ के सम्पादक राधेश्याम खेमका के निधन पर शोक श्रद्धाजंलि देने वालों का लगा रहा तांता
-मुख्यमंत्री योगी ने राधेश्याम खेमका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया
वाराणसी, 04 अप्रैल (हि.स.)। गीता प्रेस गोरखपुर के अध्यक्ष और सनातन धर्म की प्रसिद्ध पत्रिका कल्याण के संपादक राधेश्याम खेमका के निधन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई समाजसेवी और शुभचिंतक शोकाकुल है। रविवार को उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के हरिश्चन्द्र घाट पर किया गया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोविन्द भवन कार्यालय, कोलकत्ता के अध्यक्ष व गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘कल्याण’ के सम्पादक राधेश्याम खेमका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।
उधर, रविवार को वाराणसी के केदार घाट स्थित उनके आवास पर शोक श्रद्धाजंलि देने वालों का तांता लगा रहा। नगर के समाजसेवी,व्यापारी,साहित्यकार और शुभचिंतक उनके पुत्र राजाराम खेमका से मिलकर शोक संवेदना जताते रहे। काशी की प्रसिद्ध संस्थाओं मारवाड़ी सेवा संघ, मुमुक्षु भवन, श्रीराम लक्ष्मी मारवाड़ी अस्पताल गोदौलिया, बिड़ला अस्पताल मछोदरी, काशी गोशाला ट्रस्ट से आजीवन जुड़े रहे राधेश्याम खेमका के योगदान को याद कर आवास पर लोग श्रद्धांजलि देते रहे।
87 वर्षीय राधेश्याम खेमका उम्र जनित बीमारियों से पीड़ित चल रहे थे। हालत गंभीर होने पर परिजनों ने उन्हें रविन्द्रपुरी स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों के जबाब देने पर परिजन दो दिन पूर्व उन्हें घर लाये थे। बीते शनिवार को उन्होंने अपने केदार घाट स्थित आवास पर अन्तिम सांस ली।
आवास से हरिश्चन्द्र घाट तक निकली अन्तिम यात्रा में बड़ी संख्या में व्यापारी और समाजसेवी शामिल हुए। घाट पर विधि विधान से उनका अन्तिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि इकलौते पुत्र राजा राम खेमका ने दी।
गीता प्रेस गोरखपुर के अध्यक्ष अपने पीछे पुत्र राजाराम खेमका पुत्री राज राजेश्वरी देवी चोखानी, भतीजे गोपाल राय खेमका, कृष्ण कुमार खेमका, गणेश खेमका समेत नाती-पोतों से भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
परिजनों ने बताया कि दो पीढ़ियों से खेमका परिवार काशी में ही रह रहा था। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ और वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद, कथा व्यास रामचन्द्र जी डोंगरे जैसे संतों का आर्शिवाद और मार्गदर्शन परिवार के मुखिया को मिलता रहा।

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