अगरतला, 5 नवंबर: टिपरासा समझौते को लागू करने और जनजातीय समुदाय के भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग पर अपने रुख पर अडिग रहने का संदेश दिया टिपरा मोथा के पूर्व सुप्रीमो प्रद्योत किशोर देववर्मन ने। आज अगरतला हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि भूमि से संबंधित मुद्दे पर आज या कल एक अधिसूचना जारी हो सकती है। इस अधिसूचना की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रद्योत किशोर ने बताया कि कल उनकी केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बातचीत हुई थी। उन्हें उम्मीद है कि आगे की चर्चा के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया जा सकता है। हालांकि, भूमि से संबंधित मुद्दे पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं होने पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद एक महीने के भीतर समझौते को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी या अपडेट नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को जितनी जल्दी हो सके आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसमें जितनी देरी होगी, उतना ही किसी दूसरे पक्ष को फायदा होगा। त्रिपुरा का विकास सुनिश्चित करने के लिए टिपरासाओं को उनका अधिकार मिलना जरूरी है। जब तक उनके अधिकार सुनिश्चित नहीं होते, तब तक वे अपनी मांगों पर अडिग रहेंगे।
जनजातीय समुदाय के लोगों को आश्वस्त करते हुए प्रद्योत किशोर ने कहा कि जब तक वह जीवित हैं, तब तक टिपरा मोथा की राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर टिपरासा समुदाय के हितों के लिए काम करते रहेंगे। लोग उन्हें प्यार से ‘बुबाग्रा’ कहते हैं, लेकिन वह त्रिपुरा राज्य और टिपरासा समुदाय के भविष्य के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।
एकता बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न तरीकों से उनके आंदोलन और एकजुटता को भटकाने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन यदि टिपरासा समुदाय के बीच ‘थानसा’ यानी एकता बनी रहती है, तो राजनीति उन्हें विभाजित नहीं कर सकती। आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वे बातचीत जारी रखेंगे और अपने रुख पर कायम रहेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। त्रिपुरा में शांति और विकास बनाए रखना उनका उद्देश्य है। साथ ही, टिपरासा समझौते में शामिल प्रत्येक बिंदु को लागू करवाने के लिए भी वे लगातार प्रयास करते रहेंगे।
