वाशिंगटन (अमेरिका), 05 नवंबर (हि.स.)। मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी संसद पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से रिपब्लिकन पार्टी के नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं। उन्होंने और उनके प्रमुख सिपहसालारों ने स्वीकार कर लिया है कि इस पराजय की प्रमुख वजह ईरान युद्ध है। मध्यावधि चुनाव के नतीजों से वाशिंगटन मेें हलचल बढ़ गई। युद्ध विशेषज्ञों का मानना है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ईरान के साथ युद्ध करने या उसे रोकने के लिए सीमित विकल्प हैं।
इस बार आज एक्सिओस ने बेहद दिलचस्प रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार, हार के बाद ईरान को लेकर ट्रंप के सामने ज्यादातर खराब विकल्प ही हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने मान लिया है कि चुनाव में ईरान को लेकर चल रहे संघर्ष की वजह से रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब उन्हें तय करना है कि वे नुकसान कम करने के लिए कोई समझौता कर लें या फिर अपनी रणनीति पर और जोर देते हुए बमबारी का रास्ता अपनाएं।
पहला विकल्प- हमला करना, लेकिन फिर से युद्ध की ओर जाना लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। इससे गैस की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी और शायद कोई बेहतर सैन्य नतीजा भी न निकले।
दूसरा विकल्प- बातचीत करना हौ सकता है। अगर ईरानी अधिकारी कोई रियायत देने से इनकार कर दें या राष्ट्रपति की राजनीतिक हार के बाद उन्हें कमजोर समझकर अपनी मांगें और बढ़ा दें तो ट्रंप के लिए समझौता करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
तीसरा विकल्प- मौजूदा स्थिति को बनाए रखना। यानी नौसैनिक नाकाबंदी और बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध, जिससे ईरानी शासन अंदर ही अंदर “घुटता” रहे और साथ ही यह देखते रहना कि क्या वे किसी समझौते के लिए तैयार होते हैं। हालांकि, इस रास्ते पर कोई प्रगति दिखने में महीनों लग सकते हैं।
बड़ी तस्वीर- राष्ट्रपति कई हफ्तों से कह रहे हैं कि चुनाव के बाद वे किसी न किसी तरह इस संघर्ष को खत्म कर देंगे। उनके एक पूर्व सलाहकार ने बताया कि चुनाव हारना एक अलग बात है, लेकिन ट्रंप नहीं चाहेंगे कि वे दूसरी बार भी हारने वाले के रूप में दिखें। इस वजह से उनके सबसे करीबी सहयोगी भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वे आगे क्या करने वाले हैं।
दिलचस्प: बुधवार सुबह एक असाधारण बयान में उपराष्ट्रपति वेंस ने मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी (जीओपी) की करारी हार के लिए सीधे तौर पर इस संघर्ष को जिम्मेदार ठहराया। इससे ट्रंप के फैसले के पीछे एक नया राजनीतिक समीकरण जुड़ गया है। वेंस ने एक्स पर लिखा, “हम इसलिए हारे क्योंकि युद्ध चल रहा था। कल रात खुद राष्ट्रपति ने भी यही बात कही। अगर आप यह तर्क देना चाहते हैं कि यह सब जायज था – यानी अगले 6 सालों के लिए सीनेट में हार जाना भी ठीक था तो बेशक ऐसा कहें. लेकिन हर कोई जानता है कि हम क्यों हारे। और अब आगे क्या करना है, इस पर कोई भी ईमानदार चर्चा यहीं से शुरू होनी चाहिए।”
वेंस ने यह भी कहा कि इजराइल के साथ अमेरिका के संबंधों ने रिपब्लिकन के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। बुधवार को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि वेंस का विश्लेषण “काफी हद तक सही” है, क्योंकि युद्ध की वजह से गैस की कीमतें बढ़ गई थीं। लेकिन ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें फिर से ऐसा करना पड़े, तो वे करेंगे, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था। आप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने नहीं दे सकते।” उनसे पूछा गया कि वे युद्ध कब खत्म करेंगे, तो ट्रंप ने जवाब दिया, “जब भी मैं चाहूं। लेकिन इसे सही तरीके से किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।”
पर्दे के पीछे : हाल के महीनों में वेंस ने ट्रंप के करीबी लोगों के बीच एक ऐसे गुट का नेतृत्व किया है, जो उन्हें युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ समझौता करने की सलाह दे रहा था। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने निजी तौर पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि ईरान के मामले में वे “हर बात पर गलत” हैं। सूत्रों ने बताया कि वेंस ने चेतावनी दी थी कि यह युद्ध बहुत अलोकप्रिय है और इसकी वजह से रिपब्लिकन को चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप के आसपास के ज्यादातर वरिष्ठ अधिकारियों ने वेंस के विचारों से सहमति जताई। लेकिन ट्रंप का झुकाव फिर भी युद्ध को दोबारा शुरू करने की तरफ था। एक समय तो उन्होंने मध्यावधि चुनाव से पहले ही हमले करने पर विचार किया था, क्योंकि नेतन्याहू उन पर ऐसा करने के लिए दबाव डाल रहे थे। ट्रम्प ने इंतजार करने का फैसला किया। लेकिन अपने शीर्ष सलाहकारों की राय के उलट उन्होंने पिछले हफ्ते इजराइल के चुनाव में नेतन्याहू का समर्थन किया।
मौजूदा स्थिति: अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी सेना ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने की तैयारी पूरी कर रही है, जिसके तहत उस क्षेत्र में और अधिक संसाधन भेजे जा रहे हैं। वहीं, क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि कतर के मध्यस्थ, अमेरिका और ईरान को एक समझौते के मसौदे पर सहमत करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि युद्ध को दोबारा शुरू होने से रोका जा सके और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत फिर से शुरू हो सके।
चुनाव से पहले मध्यस्थों ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों से पूछा था कि अगर ट्रंप हार जाते हैं, तो वे क्या करेंगे। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि राष्ट्रपति के सलाहकार इस बारे में कुछ भी पक्के तौर पर नहीं कह सके। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी से यही कहा कि पहले हम यह देखना चाहते हैं कि चुनाव के नतीजे हमारे पक्ष में कैसे रहते हैं।” दूसरी तरफ, ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप की चुनावी हार का जश्न मनाया और कहा कि इससे साबित होता है कि वे जंग जीत रहे हैं।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने एक्स पर लिखा, “ईरानी राष्ट्र ने ट्रंप को युद्ध के मैदान और होर्मुज जलडमरूमध्य में एक रणनीतिक हार दी है और वाशिंगटन में एक राजनीतिक हार दी है।” उन्होंने कहा, “इस बीच, अमेरिकी लोग उनके युद्ध का खर्च उठाने में फंस गए हैं। जो कोई भी ईरान से उलझेगा, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगीष चाहे वह युद्ध का मैदान हो या उनका अपना घर।”
मध्यस्थता प्रयासों में शामिल राजनयिकों, ट्रंप के सलाहकारों और मध्य पूर्व के विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की इस खुशी और बयानबाजी से राष्ट्रपति के फिर से युद्ध की ओर मुड़ने की संभावना बढ़ सकती है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के डिप्टी प्रोग्राम डायरेक्टर अली वाएज ने कहा, “ईरान को यह गलती नहीं करनी चाहिए कि वह ट्रंप की राजनीतिक कमजोरी को उनकी सैन्य कमजोरी समझ ले और हद से ज्यादा आगे बढ़ जाए। समझदारी इसी में है कि जब तक वाशिंगटन किसी समझौते के लिए तैयार है, तब तक वे इस मौके का फायदा उठाकर कोई डील कर लें।”
हलचल तेज-सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। इस जीत के बाद डेमोक्रेट्स अगले साल हाउस (प्रतिनिधि सभा) और सीनेट दोनों पर नियंत्रण कर लेंगे। मतदाताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप और वाशिंगटन में जीओपी (रिपब्लिकन पार्टी) के वर्चस्व को नकार दिया है। अनुमान है कि डेमोक्रेट्स के पास हाउस की 251 से 268 सीटें होंगी। डेमोक्रेट्स ने सीनेट में कम से कम 54 सीटें हासिल कर ली हैं। टेक्सास और कंसास ने दशकों में पहली बार डेमोक्रेटिक सीनेटर चुने हैं। इसके अलावा, डेमोक्रेट्स ने ओहियो, आयोवा, नॉर्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना और मेन में भी रिपब्लिकन सीटें अपने नाम कर ली हैं।
मुकाबला कांटे का-मिसिसिपी और अलास्का में मुकाबला अभी भी कांटे का बना हुआ है और वहां वोटों की गिनती जारी है। चुनाव के नतीजों का असर दिखना शुरू हो गया है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने अपने स्टाफ को बताया है कि वे जीओपी नेता के रूप में अगला कार्यकाल नहीं मांगेंगे। इससे पार्टी के भविष्य को लेकर अंदरूनी खींचतान शुरू हो सकती है। कई सूत्रों ने बताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने सलाहकारों से पूछ रहे हैं कि क्या युद्ध सचिव पीट हेगसेथ को अपने पद पर बने रहना चाहिए, हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि वे उन्हें हटाने पर विचार नहीं कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान युद्ध “हमारी हार का कारण बना।” यह 2028 के चुनाव से पहले पार्टी के भीतर होने वाली बहस का एक संकेत हो सकता है।
टेक्टास में इकलौती जीत- रिपब्लिकन जेस यारबरो ने टेक्सास के 32वें जिले में जीत दर्ज की है। राज्य में ‘रीडिस्ट्रिक्टिंग’ के तहत रिपब्लिकन पार्टी को मिली यह इकलौती सफलता है। टेक्सास के रिपब्लिकनो को उम्मीद थी कि वे कम से कम पांच जिलों में जीत हासिल कर लेंगे। यारबरो ने डेमोक्रेट डैन बैरियोस को हराया। इस सीट पर अभी डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि जूली जॉनसन का कब्जा है, जो इस बार एक दूसरे जिले से चुनाव लड़ रही थीं।
