अगरतला, 4 नवंबर: पांच साल बीत जाने के बावजूद वर्ष 2022 की एसटीजीटी परीक्षा का परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है। लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को नियुक्ति के संबंध में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से उनमें भारी नाराजगी है। अभ्यर्थियों ने जल्द परिणाम घोषित करने, रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और अनुसूचित जनजाति (एसटी) उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 172 पदों को बरकरार रखने की मांग उठाई है। बुधवार को अगरतला प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों, कथित वंचना और भविष्य की अनिश्चितता को सामने रखा।
संवाददाता सम्मेलन में अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्ष 2022 की एसटीजीटी परीक्षा के लिए शुरुआत में कुल 230 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसके आधार पर बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने आवेदन कर परीक्षा में हिस्सा लिया था। लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि इस दौरान उन्होंने संबंधित विभाग और सरकार के विभिन्न स्तरों पर कई बार संपर्क कर जल्द परिणाम जारी करने की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि सरकार के निर्देश के बिना वे कोई कदम नहीं उठा सकते। वहीं, सरकार की ओर से भी अब तक कोई सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, राज्य में वर्तमान में शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। उच्च न्यायालय के माध्यम से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, राज्य में कुल 2,193 शिक्षक पद खाली हैं। उनका कहना है कि इन रिक्त पदों में से एसटीजीटी 2022 के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की व्यवस्था की जाए तो लंबे समय से इंतजार कर रहे कई उम्मीदवारों को रोजगार मिल सकता है। अभ्यर्थियों का दावा है कि वर्ष 2022 की परीक्षा में एक हजार से अधिक उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें से कई उम्मीदवारों को अन्य भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से पहले ही नौकरी मिल चुकी है। इसलिए उनका कहना है कि पहले परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वर्तमान में कितने उम्मीदवार नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके बाद उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को लेकर भी अभ्यर्थियों ने अपना पक्ष स्पष्ट किया। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर मामला उनकी ओर से नहीं किया गया है। इस वर्ष फरवरी में उच्च न्यायालय ने आरक्षण नियमों का पालन करते हुए नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। बाद में इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि, 29 सितंबर 2026 को जारी उच्च न्यायालय के एक आदेश से उन्हें जानकारी मिली है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी में एसटीजीटी 2022 का परिणाम घोषित करने या नियुक्ति प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। ऐसे में मुकदमे का हवाला देकर परिणाम घोषित करने में देरी करने का कोई औचित्य नहीं है।
इस दौरान अभ्यर्थियों ने एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 172 पदों को बरकरार रखने की मांग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि मूल भर्ती विज्ञापन में इन 172 पदों को अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखा गया था। उसी विज्ञापन पर भरोसा करके गरीब परिवारों के कई युवक-युवतियों ने कर्ज लेकर पढ़ाई की, बीएड की डिग्री हासिल की और शिक्षक बनने के सपने के साथ परीक्षा में शामिल हुए। लेकिन पांच वर्षों से परिणाम लंबित रहने के कारण उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। कई उम्मीदवार आर्थिक संकट के साथ-साथ मानसिक तनाव से भी गुजर रहे हैं। इसलिए आरक्षित पदों की संख्या में किसी भी तरह की कटौती या बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए पिछले पांच वर्षों में कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात करने का अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि यह केवल भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी प्रशासनिक जटिलता नहीं है, बल्कि हजारों शिक्षित बेरोजगार युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा का सवाल है।
संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री सह शिक्षा मंत्री से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस मामले पर विचार करने की अपील की। उनकी प्रमुख मांगों में एसटीजीटी 2022 का परिणाम जल्द घोषित करना, राज्य में उपलब्ध रिक्त पदों का उचित उपयोग करते हुए नियुक्ति की व्यवस्था करना और मूल विज्ञापन में एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 172 पदों को यथावत रखना शामिल है।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कहा कि पांच वर्षों तक इंतजार करने के बाद अब वे किसी नए आश्वासन या बहाने को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने तत्काल परिणाम घोषित कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
