अगरतला, 3 नवंबर: आरएसएस-भाजपा विरोधी आंदोलन केवल वामपंथियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन है। जो लोग संविधान के सिद्धांतों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और आम जनता के अधिकारों की रक्षा में विश्वास रखते हैं, उन्हें इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए। त्रिपुरा दौरे पर पहुंचीं स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आइशी घोष ने आरएसएस और भाजपा पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस के प्रभाव और भाजपा सरकार की नीतियों के कारण पूरे देश में सुनियोजित तरीके से शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। शिक्षा की बढ़ती लागत और उसके व्यावसायीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इसके चलते आम परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करना लगातार कठिन होता जा रहा है।
आइशी घोष ने आगे आरोप लगाया कि एक के बाद एक जनविरोधी नीतियों के जरिए देश में संवैधानिक अधिकारों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। उनका दावा है कि त्रिपुरा में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है।
उन्होंने बताया कि डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और एसएफआई द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए वह त्रिपुरा आई हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की मांग पर आम लोगों को संगठित करने का काम दोनों संगठन कर रहे हैं।
आइशी घोष ने कहा कि देश के संविधान और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए गरीबों, श्रमिकों और मेहनतकश लोगों को एकजुट होना होगा। आरएसएस और भाजपा के खिलाफ लड़ाई को केवल वामपंथियों या किसी एक राजनीतिक दल की लड़ाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन है। संविधान के सिद्धांतों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और लोगों के अधिकारों की रक्षा में विश्वास रखने वाले सभी लोगों को इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि त्रिपुरा में इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में डीवाईएफआई और एसएफआई अग्रणी भूमिका निभाएंगे। देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हो रहे हमलों के खिलाफ समाज के सभी वर्गों के लोगों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील भी की।
