ईटानगर, 24 अक्टूबर। अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना के विरोध में शुक्रवार को हुए बंद के दौरान पासीघाट में हिंसा और आगजनी हुई। प्रदर्शनकारियों ने एनएचपीसी कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी तथा कई राजनीतिक नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की। घटना पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को शांति की अपील की और कहा कि परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों की आशंकाओं पर सरकार बातचीत के लिए तैयार है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हिंसा के दौरान पासीघाट में प्रदर्शनकारियों की कथित पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। राज्य भाजपा अध्यक्ष कलिंग मोयोंग समेत दो राजनीतिक नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्थानीय विधायक ओनी पन्यांग और वरिष्ठ विधायक निनोंग एरिंग के घरों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें हैं। आदि बाने केबांग (एबीके) परिसर को भी नुकसान पहुंचाया गया।
सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में विभिन्न संगठनों ने परियोजना के विरोध में शुक्रवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिन में बंद काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बंद की अवधि समाप्त होने के बाद पासीघाट में हिंसा भड़क गई। घटनाएं शनिवार तड़के करीब 3.30 बजे तक जारी रहीं।
पुलिस के अनुसार, 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर दाओ, लाठी और गुलेल लेकर पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ करने तथा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके गए। पूर्वी सियांग के मेबो क्षेत्र में रनाघाट पुल के पास भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की सूचना है।
बंद का संयुक्त आह्वान आदि बाने केबांग यूनाइटेड, एसयूएमपी प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की युवा शाखा और आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी ने किया था। प्रदर्शनकारी 10 गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित गांव बुड़ाओं की बहाली, परियोजना से संबंधित प्रारंभिक व्यवहार्यता सर्वेक्षण की गतिविधियां रोकने और क्षेत्र में तैनात अर्धसैनिक तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने की मांग कर रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस ने हिंसा की निंदा करते हुए बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
हिंसा की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन आंदोलन कानून के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों की आशंकाओं पर खांडू ने कहा कि राज्य सरकार सभी संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने परियोजना के संभावित लाभ, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर खुली बातचीत की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। एसयूएमपी परियोजना पर चर्चा करने का इच्छुक कोई भी संगठन या संघ आगे आ सकता है। लोगों को सरकार से सवाल पूछने चाहिए, परियोजना के संभावित लाभ और नुकसान पर चर्चा करनी चाहिए तथा अपनी आशंकाओं का समाधान मांगना चाहिए।”
खांडू ने बताया कि सरकार ने विभिन्न संगठनों को बैठकों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने सियांग क्षेत्र के प्रतिनिधियों को ईटानगर, पासीघाट या उनकी सुविधानुसार किसी अन्य स्थान पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारियों के साथ स्वयं भी उनके चुने हुए स्थान पर पहुंचने की पेशकश की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में जनसहमति महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने संगठनों और सामुदायिक प्रतिनिधियों से गोलमेज बैठक में हिस्सा लेने तथा अपनी आपत्तियां और आशंकाएं सामने रखने की अपील की। उनके मुताबिक, मतभेदों का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार पहले स्पष्ट कर चुकी है कि फिलहाल परियोजना से जुड़ी गतिविधियां तकनीकी और पर्यावरणीय सर्वेक्षण तक सीमित हैं। इनका उद्देश्य परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) तैयार करना है।
