अगरतला, 23 अक्टूबर: अपनी निजी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन के एक वर्ग पर लापरवाही और उदासीनता का आरोप लगाया है विधायक रंजीत देबबर्मा ने। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) को बार-बार बदला जा रहा है। इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और न ही कोई प्रभावी कदम उठाया गया। इस स्थिति से नाराज होकर विधायक ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अपने सुरक्षा दायित्व में तैनात पीएसओ को छोड़ने की घोषणा की। साथ ही, शहर में असुरक्षा की आशंका जताते हुए अपने गांव लौटकर रहने का निर्णय भी लिया।
विजयादशमी और दुर्गोत्सव की शुभकामनाएं देने के बाद संवाददाता सम्मेलन में रंजीत देबबर्मा ने कहा कि विधायक बनने के बाद पिछले लगभग साढ़े चार वर्षों से उनके सुरक्षा कर्मियों को बार-बार बदला जा रहा है। कभी पीएसओ को वापस बुला लिया जाता है, तो कभी उनकी जगह किसी दूसरे सुरक्षा कर्मी को भेज दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह उनकी सुरक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
विधायक के अनुसार, गत 10 अक्टूबर को दुर्गापूजा से पहले उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना, लिखित निर्देश या आधिकारिक पत्र के उनके एक पीएसओ को हटा दिया गया। इस मामले में उन्होंने 13 अक्टूबर को पुलिस सुरक्षा शाखा के अधीक्षक को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा और राज्य के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई थीं। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला, ऐसा दावा उन्होंने किया।
उन्होंने बताया कि अपनी सुरक्षा बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार की मांग को लेकर वह कई बार पत्र लिख चुके हैं। संबंधित अधिकारी से बार-बार पीएसओ बदले जाने का कारण पूछने पर उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण इसका कारण बताना आवश्यक नहीं है। विधायक ने इस रवैये पर भी सवाल उठाए।
रंजीत देबबर्मा ने दावा किया कि राज्य के कई विधायक आठ-नौ वर्षों से एक ही पीएसओ के साथ काम कर रहे हैं, जबकि उनके मामले में बार-बार सुरक्षा कर्मियों को बदला जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उनके साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है और इसका स्पष्ट कारण क्यों नहीं बताया जा रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल उनके ही नहीं, बल्कि टिपरा मोथा के कुछ जनप्रतिनिधियों तथा राज्य के अन्य विधायकों और टीटीएएडीसी के सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था में भी इसी तरह बदलाव किए जा रहे हैं।
इस घटनाक्रम के पीछे जनजातीय जनप्रतिनिधियों के प्रति किसी भेदभावपूर्ण रवैये की संभावना पर भी उन्होंने सवाल उठाया। हालांकि, इस संबंध में कोई निश्चित आरोप लगाने के बजाय उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है और पूरे मामले का वास्तविक कारण सामने आना चाहिए।
संवाददाता सम्मेलन में विधायक ने घोषणा की कि वह अपने सुरक्षा दायित्व में तैनात पीएसओ को छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर में रहने के दौरान उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों में शामिल होना पड़ता है, जिसके लिए सुरक्षा आवश्यक है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में शहर में रहना उन्हें सुरक्षित नहीं लग रहा है। इसलिए वह अपने गांव लौटकर वहीं से संगठनात्मक और अन्य गतिविधियां संचालित करेंगे।
जनता के प्रति भरोसा जताते हुए रंजीत देबबर्मा ने कहा कि वह जनता के बीच से उठकर आए हैं और उन्हें विश्वास है कि लोग उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने अपनी सुरक्षा का दायित्व जनता पर छोड़ने की बात भी कही।
विधायक ने मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा से यह भी आग्रह किया कि पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ अधिकारी सरकार को कमजोर करने या उसके खिलाफ षड्यंत्र रचने की कोशिश कर रहे हो सकते हैं। उन्होंने ऐसे अधिकारियों की पहचान कर मामले की जांच कराने की मांग की।
रंजीत देबबर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने किसी भी पीएसओ से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। यदि किसी सुरक्षा कर्मी के खिलाफ कोई शिकायत होती या उसके व्यवहार को लेकर समस्या सामने आती, तो उन्हें उसे बदलने पर आपत्ति नहीं होती। लेकिन बिना किसी शिकायत के और उन्हें सूचित किए बिना बार-बार पीएसओ बदले जाने का कारण वह जानना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री के साथ इस मुद्दे पर सीधे बातचीत होने के सवाल पर विधायक ने बताया कि अभी तक इस संबंध में उनकी चर्चा नहीं हुई है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में संबंधित राजनीतिक नेतृत्व के साथ इस विषय को उठाने के संकेत भी उन्होंने दिए।
विधायक के आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
