संयुक्त राष्ट्र, 7 अक्टूबर (आईएएनएस): भारत ने आतंकवाद के पीड़ितों और आतंकवाद के अपराधियों के बीच अंतर करने में विफल रहने को लेकर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की कड़ी आलोचना की है। भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की कार्रवाई पर ओआईसी के रुख को ‘जानबूझकर की गई अंधता’ करार दिया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए बिप्लब कुमार देब ने कहा कि पाकिस्तान से संचालित सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करना भारत का अधिकार है। उन्होंने कहा, “आतंकवाद में शामिल होने के परिणाम भुगतने ही होंगे।”
उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान की धरती और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की ‘लक्षित और संयमित’ कार्रवाई पर ओआईसी के अध्यक्ष सऊदी अरब की ओर से दिए गए बयान के जवाब में की।
बिप्लब देब ने कहा, “जिन लोगों ने यह बयान दिया है, वे दुर्भाग्य से तथ्यों और कल्पना के बीच तथा पीड़ित और अपराधी के बीच अंतर नहीं कर पाए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ओआईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों पर पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे कथित दमन की निंदा करने से इनकार करता रहा है।
ओआईसी के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “इस तरह की जानबूझकर की गई अंधता केवल पक्षपात और असहिष्णुता को दर्शाती है।”
सऊदी अरब की ओर से ओआईसी के बयान में भारत का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया था, लेकिन पिछले वर्ष पाकिस्तान स्थित एक आतंकवादी संगठन के हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का संदर्भ दिया गया था।
बिप्लब देब ने कहा कि भारत के खिलाफ हमलों की योजना और निर्देश पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचे से दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की कार्रवाई पर ओआईसी की टिप्पणी अनुचित है।
उन्होंने भारत के केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर ओआईसी की टिप्पणी की भी आलोचना की। उनका कहना था कि ओआईसी के अध्यक्ष को पाकिस्तान के कथित अवैध कब्जे पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलाकोट में आम लोगों की हत्या, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के आरोपों का उल्लेख किया।
मानवाधिकार संगठनों के हवाले से दावा किया गया है कि हाल के महीनों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 90 से अधिक लोग मारे गए हैं। आर्थिक अधिकारों और बाहरी लोगों की बसावट के विरोध सहित विभिन्न मांगों को लेकर वहां आंदोलन हुए हैं। आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और सैन्य बलों ने इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में शामिल हैं।
