नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने मंगलवार को कांग्रेस पर मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर जमकर निशाना साधा। सिद्धार्थ यादव ने पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया और माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले डुप्लीकेट और फर्जी नामों को मतदाता सूची से हटाने की मांग करती थी, लेकिन अब जब मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण हो रहा है तो वही कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।
सिद्धार्थ यादव ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए एक नया नैरेटिव खड़ा किया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस का राजनीतिक यू-टर्न और उसका बदलता नैरेटिव सुविधा की राजनीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।”
भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में सिद्धार्थ यादव ने आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 2018 में कांग्रेस के एक नेता ने मतदाता सूची में करीब 50 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियां होने का दावा किया था और इन्हें हटाकर मतदाता सूची को संशोधित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में भी कांग्रेस का यही रुख था। कांग्रेस उस समय कहती थी कि अगर डुप्लीकेट नाम नहीं हटाए गए तो यह लोकतंत्र के साथ धोखा होगा।
सिद्धार्थ यादव ने राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि 15 अगस्त 2018 को कांग्रेस ने राज्य में करीब 42 लाख डुप्लीकेट नाम होने का आरोप लगाया था और इन्हें हटाने की मांग की थी। उनके मुताबिक, बाद में एसआईआर प्रक्रिया में करीब 41.85 लाख नाम हटाए गए।
उन्होंने केरल का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने वहां करीब 4.34 लाख डुप्लीकेट नाम होने का आरोप लगाया था। इस मुद्दे को लेकर वेबसाइट बनाई गई और मामला हाईकोर्ट तक ले जाया गया। यादव के अनुसार, बाद में एस आई आर में करीब 8.57 लाख डुप्लीकेट नाम पाए गए और उन्हें हटाया गया।
भाजपा नेता ने कहा कि केरल में विशेष पुनरीक्षण के बाद कांग्रेस की जीत हुई तो पार्टी ने इसे मददगार और अच्छी प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस नेताओं और राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री की ओर से मतदाता सूची में गलत नाम शामिल होने को लेकर आरोप लगाए गए थे।
सिद्धार्थ यादव ने बिहार का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 2013 में बिहार में करीब 76 लाख कथित ‘घोस्ट वोटर्स’ का मुद्दा उठाया गया था, उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी। उन्होंने दावा किया कि 2025 में एस आई आर के बाद करीब 65 लाख नाम हटाए गए।
उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस उसी प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जिसे वह पहले मतदाता सूची को साफ करने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी बताती थी। यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रुख समय-समय पर उसके राजनीतिक हित के अनुसार बदलता रहा है।
