नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की रफ्तार 188 किमी प्रति घंटा थी, वैज्ञानिकों का दावा

काठमांडू, 19 सितंबर (हि.स.)। तिब्बत से होते हुए नेपाल के रसुवा स्थित भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर अध्ययन और अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिक लगातार नए तथ्य सामने ला रहे हैं। इसी क्रम में विश्व मौसम संबंधी घटनाओं का अध्ययन करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्लूडब्लूए) ने भोटेकोशी बाढ़ की रफ्तार को लेकर नया निष्कर्ष जारी किया है।

इससे पहले नेपाल के बाढ़ विशेषज्ञों ने भोटेकोशी बाढ़ की गति को अबतक की सबसे तेज बाढ़ बताया था। बाढ़ आने के अगले दिन, २७ अगस्त को बाढ़ विशेषज्ञ दिनकर कायस्थ ने इसकी गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने का अनुमान जताया था। उन्होंने कहा था कि यह संभवतः नेपाल में दर्ज अबतक की सबसे तेज बाढ़ हो सकती है।

हालांकि, डब्लूडब्लूए के अध्ययन में बाढ़ की गति इससे दो गुना से भी अधिक बताई गई है। डब्लूडब्लूए के अनुसार, २६ अगस्त को रसुवा के लांगटांग लिरुंग हिमाल में 5,150 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित एक विशाल चट्टानी हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इसके साथ ऊपर मौजूद ग्लेशियर का एक हिस्सा भी नीचे आ गया। बड़ी मात्रा में चट्टान और बर्फ एक साथ नीचे गिरने के कारण पानी, मिट्टी, पत्थर और बर्फ का विशाल मिश्रण तेज गति से बहने लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, जब यह मलबा ल्हेन्दे खोला तक पहुंचा, तब तक यह एक शक्तिशाली बाढ़ में बदल चुका था। इस बाढ़ की औसत गति करीब 188 किलोमीटर प्रतिघंटा थी।

इस अध्ययन में विभिन्न देशों के 20 से अधिक वैज्ञानिक शामिल हैं। बेन क्लार्क, मरियम जकारिया, बेथान डेविस, रेजिन हक और वाल्टर इम्मरजिल समेत विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के सहयोग से रिपोर्ट तैयार की गई है।

22 किमी की दूरी सिर्फ 7 मिनट में तय

रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ ने लांगटांग क्षेत्र से रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र तक करीब 22 किलोमीटर की दूरी महज 7 मिनट में तय कर ली थी। यह रफ्तार सामान्य रेलगाड़ी की गति के बराबर बताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, नेपाल की नदियों में इस तरह की गति का उदाहरण पहले देखने को नहीं मिला था। इसी रफ्तार से चट्टान, बर्फ, मिट्टी और पानी का मिश्रण भोटेकोशी नदी में पहुंचा और फिर नीचे के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।

पांच जिलों में भारी तबाही

हिम चट्टानों और मलबे के साथ आया यह प्रवाह भोटेकोशी होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंचा। इस दौरान रसुवा, नुवाकोट, धादिङ समेत पांच जिलों के 15 स्थानीय तह में बड़े पैमाने पर जनधन और भौतिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। इस आपदा में अब तक 1,400 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 6,000 लोग लापता बताए गए हैं। बाढ़ से अरबों रुपये की भौतिक संरचनाएं भी नष्ट हुई हैं। तेज बहाव ने टिमुरे, स्याफ्रुबेँसी, मैलुङ, बेत्रावती, सोले, तुप्चे, भैंसे, त्रिशूली ढुंगे और देवीघाट सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन का कटाव किया और तबाही मचाई।

200 किमी दूर देवघाट पहुंचने में लगे 7 घंटे से भी कम

वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार, बाढ़ का प्रवाह करीब 200 किलोमीटर दूर चितवन के देवघाट तक सात घंटे से भी कम समय में पहुंच गया था। देवघाट में नदी का प्रवाह बढ़कर प्रति सेकंड करीब 5,850 घनमीटर तक पहुंच गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, चार घंटे से भी कम समय में करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी नदी में बह गया। इसके अलावा करीब 3 करोड़ 5 लाख घनमीटर मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा भी बाढ़ के साथ बहकर विभिन्न क्षेत्रों में जमा हो गया। इससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में विनाश का स्तर और अधिक बढ़ गया।

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