काठमांडू, 18 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बच्चों पर संकट और गहरा गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद की त्वरित आकलन रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ में 102 बच्चों के माता-पिता दोनों लापता हैं। इनमें 49 लड़कियां और 53 लड़के शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धादिङ जिलों में ही कम-से-कम 17 हजार बच्चों को संरक्षण की आवश्यकता है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। परिवार से अलग हुए और अभिभावकीय देखभाल से वंचित बच्चों के सामने जोखिम भी बढ़ गया है।
अध्ययन के अनुसार, 439 बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ गए हैं, जिनमें 222 लड़कियां और 217 लड़के हैं। वहीं, 692 प्रभावित बच्चे अपने माता-पिता या अन्य अभिभावकों के साथ हैं। इनमें 361 लड़कियां और 331 लड़के शामिल हैं। प्रभावित बच्चों में 21 दिव्यांग बच्चे भी हैं।
बाढ़ से प्रभावित 32 स्कूलों में से 19 पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन स्कूलों में करीब 9,400 विद्यार्थी नामांकित थे, जिनमें 3,928 विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 488 विद्यार्थी अब भी लापता हैं, जबकि पांच विद्यार्थियों की मौत हो चुकी है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद ने इसे केवल तत्काल राहत का विषय नहीं बल्कि बाल अधिकार, संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पारिवारिक देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और दीर्घकालीन विकास से जुड़ा बहुआयामी मानवीय संकट बताया है। रिपोर्ट में प्रभावित बच्चों की पहचान, परिवार की तलाश और पुनर्मिलन, सुरक्षित अस्थायी आश्रय, शिक्षा जारी रखने, स्वास्थ्य-पोषण और मनोसामाजिक सहायता को तत्काल प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई है।
परिषद की टीम ने 1-5 सितंबर के बीच रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा, तनहुँ और चितवन के प्रभावित क्षेत्रों, अस्थायी आश्रय स्थलों और होल्डिंग सेंटरों का अध्ययन किया। 5 सितंबर तक बाढ़ प्रभावित जिलों के होल्डिंग सेंटरों में 1,233 बच्चे मौजूद थे, जिनमें 632 लड़कियां और 601 लड़के थे।
प्रभावित बच्चों की व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर बाल अधिकार समितियों के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। माता-पिता के लापता होने की स्थिति में पहले परिवार के अन्य सदस्यों या रिश्तेदारों के साथ बच्चों को रखने का प्रयास किया जाएगा। यदि ऐसा संभव नहीं हुआ तो कानूनी प्रक्रिया के तहत परिवार-आधारित देखभाल या बाल गृह की व्यवस्था की जाएगी।
ललितपुर के गोदावरी में प्रभावित बच्चों के लिए अस्थायी संरक्षण केंद्र भी तैयार किया गया है। यहां करीब 50 बच्चों को रखने की क्षमता है और उपचार, मनोसामाजिक परामर्श तथा शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है।
इसी बीच, काठमांडू के डल्लु स्थित गीतामाता माध्यमिक विद्यालय में भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित 70 बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई गई है। इन बच्चों को पढ़ाई के साथ मनोसामाजिक परामर्श, स्वास्थ्य जांच और खेलकूद की सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
