भोपाल, 14 सितम्बर (हि.स.)। गणेश चतुर्थी पर सोमवार को घरों से लेकर मंदिरों और गणेश पंडालों तक गणपति उत्सव की शुरुआत हो रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के खजराना गणेश मंदिर में करीब 7 करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषणों से बप्पा का श्रृंगार किया गया, जबकि बड़ा गणपति मंदिर में 101 किलो लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में श्रद्धालु मनोकामना के लिए उल्टा स्वास्तिक बनाने की परंपरा निभाएंगे।
मध्य प्रदेश में घरों से लेकर बड़े गणेश मंदिरों और पंडालों तक उत्सव की धूम मची हुई है। इंदौर के खजराना गणेश, बड़ा गणपति और उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में विशेष पूजन, श्रृंगार और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच रही है। खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणेश का स्वर्ण आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। इससे पहले रविवार को ब्रह्ममुहूर्त में भगवान को हीरे जड़ित नेत्र धारण कराए गए। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में सवा लाख मोदक का भोग भी लगाया गया।
खजराना गणेश मंदिर में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान से प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने मंदिर में ध्वज पूजन भी किया। गणेश चतुर्थी के मौके पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आयोजन किए जा रहे हैं।
खजराना गणेश मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है, जिसे वर्ष 1735 में होलकर वंश की महान महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया था। मान्यता है कि यहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
बड़ा गणपति मंदिर में 101 किलो लड्डुओं का भोग
इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित बड़ा गणपति मंदिर में इस बार गणेशोत्सव खास है। मंदिर को 125 साल पूरे हो रहे हैं। यहां भगवान गणेश की 25 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी अद्भुत प्रतिमा है। प्रतिमा 4 फीट चौड़े और 16 फीट लंबे चौकोर आसन पर विराजमान है, जो पांच फीट ऊंचा है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित धनेश्वर दाधिच के मुताबिक, गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सोमवार को सवा मन शुद्ध गाय के घी से घर पर बनाए गए लड्डुओं का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। इसमें 5 किलो के बड़े लड्डू से लेकर डिसेंडिंग ऑर्डर में लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा, जो लगभग 101 किलो का होगा। इसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरण शुरू कर दिया जायेगा। भगवान गणेश की रोजाना रात 9 बजे एक घंटे की संगीतमय आरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर में आने और जाने के लिए अलग-अलग गेट बनाए गए हैं। भक्त करीब 10 मिनट भगवान के सामने दर्शन कर सकेंगे।
चिंतामन गणेश में उल्टा स्वास्तिक बनाने की परंपरा
उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का अलग रंग देखने को मिलता है। मंदिर की खास परंपराओं में से एक मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाना है।
पुजारी गणेश गुरु के मुताबिक, विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले श्रद्धालु भगवान की पीठ की ओर उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर आते हैं और वहां सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।
कई श्रद्धालु मंदिर में रक्षा सूत्र भी बांधते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद वे दोबारा मंदिर पहुंचकर रक्षा सूत्र खोलते हैं। मंदिर परिसर में बड़ा तराजू भी रखा हुआ है। मान्यता पूरी होने के बाद श्रद्धालु अनाज, लड्डुओं या अन्य प्रसाद से तुलादान करते हैं। कई परिवार संतान प्राप्ति के बाद बच्चे के वजन के बराबर लड्डुओं का तुलादान कर उसे श्रद्धालुओं में वितरित करते हैं।
मंदसौर में एक शिला पर विराजमान द्विमुखी गणपति
मंदसौर के द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर में एक ही शिला पर बनी करीब 8 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा के दोनों ओर से दर्शन होते हैं। मंदसौर के द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल के मुताबिक, प्रतिमा के उत्तरी भाग में पंचमुखी गणेश का स्वरूप है, जबकि दक्षिण दिशा में भगवान पगड़ीधारी सेठ के रूप में दर्शन देते हैं। इसी वजह से इन्हें ‘सेठ गणेश’ भी कहा जाता है।
मान्यता है कि वर्ष 1929 में यह प्रतिमा नाहर सय्यद दरगाह के पास स्थित तालाब से मिली थी। बैलगाड़ी से प्रतिमा को नरसिंहपुरा ले जाते समय वर्तमान गणपति चौक पर बैलगाड़ी रुक गई। काफी प्रयास के बाद भी बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद प्रतिमा को वहीं स्थापित कर दिया गया और इस स्थान का नाम गणपति चौक पड़ा।
शाजापुर में हनुमानजी के साथ विराजमान हैं गणेश
शाजापुर जिले के बोलाई गांव में करीब 300 साल पुराना सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में हनुमानजी के साथ गणेशजी की प्रतिमा भी विराजमान है। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। करीब 300 साल पुराने इस मंदिर में गणेशजी की मौजूदगी गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।
