अगरतला, 26 अगस्त: त्रिपुरा विधानसभा का तीन दिवसीय मानसून सत्र गुरुवार सुबह 11 बजे से शुरू होगा। सत्र के पहले ही दिन राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ की मौत के मामले में मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री प्रो. डॉ. माणिक साहा विधानसभा में बयान देंगे।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पूर्व डीजीपी की मौत की परिस्थितियों और इस मामले में राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी सदन को देंगे।
इस बीच, तीन विधायकों ने महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने के लिए नोटिस दिया है। कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन राज्य में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को उठाएंगे। वहीं, विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी विभिन्न सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा सदन में रखेंगे। टिपरा मोथा के विधायक रंजीत देबबर्मा त्रिपुरा के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (PRTC) से संबंधित विषय उठाएंगे।
अंतिम कार्यसूची के अनुसार, सत्र के पहले दिन 22 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए जाएंगे। इसके अलावा 13 अतारांकित प्रश्नों के लिखित उत्तर दिए जाने हैं। इनमें कुछ प्रश्न ऐसे हैं, जिन्हें एक से अधिक विधायकों ने प्रस्तुत किया है।
सत्र की शुरुआत में दिवंगत विशिष्ट व्यक्तियों के सम्मान में शोक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की रिपोर्ट सदन में पेश कर उसे मंजूरी दी जाएगी। प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत के संबंध में बयान दिए जाने की संभावना है।
सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज और कानूनों में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव भी पेश किए जाएंगे। वित्त मंत्री प्रणजीत सिंह रॉय त्रिपुरा स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 में संशोधन से संबंधित दस्तावेज सदन में रखेंगे।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सांतना चकमा त्रिपुरा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, 2026 से संबंधित अध्यादेश विधानसभा में पेश करेंगी। वहीं, खाद्य एवं जनवितरण मंत्री त्रिपुरा लीगल मेट्रोलॉजी (एनफोर्समेंट) थर्ड अमेंडमेंट रूल्स, 2026 सदन में रखेंगे।
इसके अलावा वन मंत्री अनिमेष देबबर्मा त्रिपुरा फॉरेस्ट डेवलपमेंट एंड प्लांटेशन कॉरपोरेशन की वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा में पेश करेंगे।
महज तीन दिनों के इस सत्र में जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दों के साथ-साथ सरकार के कामकाज और विभिन्न विधायी मामलों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में विधानसभा के इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सत्र को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खासा उत्साह बना हुआ है।
