तेहरान, 3 अगस्त (आईएएनएस): ईरान ने कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक “अस्थायी” समुद्री मार्ग तय करने को लेकर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह जानकारी सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
बघाई ने बताया कि वार्ता का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे मध्यवर्ती मार्ग का निर्धारण करना है, जो ओमान के जलक्षेत्र से गुजरने वाले दक्षिणी मार्ग और ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरने वाले उत्तरी मार्ग के बीच स्थित होगा। स्थायी मार्ग तय होने तक इसी अस्थायी मार्ग का उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बातचीत दो या तीन अलग-अलग मार्गों पर नहीं, बल्कि आने-जाने के लिए एक साझा द्विदिशीय समुद्री गलियारा बनाने पर केंद्रित है। बघाई का दावा था कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति के लिए ईरान और ओमान के बीच कोई मतभेद जिम्मेदार नहीं है, बल्कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की “सैन्य आक्रामकता” इसकी वजह है। उन्होंने कहा कि जब तक वॉशिंगटन अपनी “शत्रुतापूर्ण” कार्रवाइयां जारी रखेगा, तब तक जलडमरूमध्य की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।
रविवार को तेहरान में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी कहा था कि ओमान के साथ इस मुद्दे पर बातचीत अंतिम चरण में है।
इस बीच, बघाई ने कहा कि हाल ही में यूक्रेन द्वारा एक ईरानी जहाज पर किए गए हमले के मामले में कीव को जवाबदेह ठहराने के लिए ईरान हर आवश्यक कदम उठाएगा। उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया था कि यूक्रेनी बलों ने कैस्पियन सागर में एक रूसी युद्धपोत और ईरान से जुड़े सैन्य सामान ले जा रहे कुछ जहाजों को निशाना बनाया था।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि ईरान के साथ वार्ता सोमवार दोपहर से शुरू होगी। उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर ने अमेरिका से प्रस्तावित सैन्य हमले को टालने का आग्रह किया है, क्योंकि उन्हें समझौते की संभावना नजर आ रही है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर समझौते की संभावना है और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम या “डी-न्यूक्लियराइजेशन” पर भी सहमति बन सकती है। उनका दावा था कि ईरान ने भी अमेरिका से प्रस्तावित हमले को रोकने का अनुरोध किया है और फिलहाल दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
