कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती: प्रधानमंत्री

अहमदाबाद, 11 मई: 1998 के पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट की याद को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की आत्मनिर्भरता और मज़बूती का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की ताकतों के दबाव के आगे भी भारत कभी नहीं झुका है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगा।

प्रधानमंत्री ने 11 और 13 मई, 1998 को पोखरण में किए गए न्यूक्लियर टेस्ट को देश के इतिहास में एक “मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि इस टेस्ट के ज़रिए भारत ने दुनिया को अपनी साइंटिफिक और स्ट्रेटेजिक क्षमता दिखाई थी।

सोमवार को सोमनाथ मंदिर में ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ प्रोग्राम में बोलते हुए उन्होंने 1998 की घटनाओं पर रोशनी डाली और उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लीडरशिप की तारीफ़ की।

उन्होंने कहा, “भारत ने 11 मई को पोखरण में न्यूक्लियर टेस्ट किए। हमारे साइंटिस्ट्स ने दुनिया को देश की ताकत दिखाई, जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत के इस कदम के बाद इंटरनेशनल कम्युनिटी ने आर्थिक पाबंदियां लगाईं और दबाव डाला, लेकिन भारत पीछे नहीं हटा।

उन्होंने कहा, “जब दुनिया की ताकतें एक साथ दबाव डालती हैं, तो कई लोग टूट जाते हैं। लेकिन हम दूसरी दुनिया के लोग हैं। भले ही 11 मई के बाद निगरानी बढ़ाई गई, हमारे वैज्ञानिकों ने काम पूरा किया और 13 मई को फिर से टेस्ट किया गया।”

मोदी के मुताबिक, उस समय भारतीय लीडरशिप ने दिखाया कि देश के हित से बड़ा कुछ नहीं है और कोई भी ताकत भारत को घुटनों पर नहीं ला सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर मिशन का नाम “ऑपरेशन शक्ति” रखा गया, जो भारत के आत्मविश्वास और स्ट्रेटेजिक स्थिति का प्रतीक है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत 1974 में पोखरण-1 टेस्ट और 1998 में पोखरण-2 टेस्ट के ज़रिए न्यूक्लियर ताकतों की लिस्ट में शामिल हुआ था, और ग्लोबल डिप्लोमैटिक और स्ट्रेटेजिक स्थिति में एक बड़ा बदलाव आया था।

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