आज विश्व मलेरिया दिवस है। इस दिन का उद्देश्य मलेरिया से बचाव, नियंत्रण और इलाज के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना है। इस दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने वर्ष 2007 में की थी। इस वर्ष का विषय है- ड्रिवेन टू एन्ड मलेरिया: नाउ वी कैन। नाउ वी मस्ट।
इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोगों से एकजुट होकर मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मलेरिया आज भी कई लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन समय पर सावधानी और इलाज से इसे रोका जा सकता है। उन्होंने साफ-सफाई बनाए रखने, मच्छरों से बचाव करने और समय पर जांच कराने की सलाह दी।
वहीं, अखिल भारतीय आर्युर्विज्ञान संस्थान -एम्स, नई दिल्ली के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि मलेरिया एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द और फ्लू जैसे लक्षण शामिल हैं। डॉ. निश्चल ने लोगों को सलाह दी कि वे अपने आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि इससे मच्छर पनपते हैं। उन्होंने मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, पूरे बाजू के कपड़े पहनने और मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाने की भी सलाह दी।
