नई दिल्ली, 05 मई (हि.स.)। जीते तो सभी है,लेकिन जो दूसरों के लिये जिये उसे जिंदगी कहते है। यह कहावत दिल्ली पुलिस में तैनात कांस्टेबल रविन्द्र धारीवाल और अमित फोगाट पर सटीक बैठती है। जो अभी तक अंजान लोगों के लिये सैकड़ों से ज्यादा बार अपना खून दान कर चुके है। इनसे सीख लेते हुए दिल्ली पुलिस के कई कर्मी भी रक्तदान करने लगे हैं। आलम यह है कि रविन्द्र ने अपना एक व्हॉट्सएप ग्रुप भी बना रखा है। जिसकी सहायता से हर रोज कोई न कोई जरूरतमंद को रक्तदान कर रहा है।
रविन्द्र और अमित के इस कार्य को देखते हुए लोग उनकी काफी सराहना भी करते हैं। रविन्द्र का कहना है कि“ रक्त दान महादान” नारे लगाने से अच्छा है, किसी की निःस्वार्थ सहायता करें। खून के रिश्ते से बड़ा इंसानियत का फर्ज होता है। आपकी छोटी से मदद से किसी के घर का चिराग बच जाये इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। रविन्द्र की माने तो एक साल में एक से दो बार जरूर ब्लड डोनेट करना चाहिए। जिससे आपका खून किसी जरूरतमंद के काम आ सके।
फेसबुक की दोस्ती ने बदल दी पूरी सोच
वर्ष 2016 में दिल्ली पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुए रविन्द्र धारिवाल मूलत: भिवानी के रहने वाले है। फिलहाल उनकी तैनाती 6 बाटालियन में है। रविन्द्र के अनुसार, वर्ष 2016 में फेसबुक के जरिए उनकी दोस्ती पुष्कर नामक व्यक्ति से हुई।
बात-चीत के दौरान पुष्कर ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ जरूरतमंद लोगों को ब्लड डोनेट करते है। पुष्कर की बातों से प्रभावित होकर रविन्द्र ने भी ब्लड डोनेट करने का मन बनाया। सबसे पहले रविन्द्र ने आईएलबीएस अस्पताल में ब्लड डोनेट किया। यहां से ब्लड डोनेट का शुरू हुआ सिलसिला 78 तक पहुंचा। वहीं अमित अब तक करीब 86 लोगों को ब्लड डोनेट कर चुके है।
सरहद पार से आए जरूरतमंदों को भी दिया खून
आपके ब्लड डोनेट करने से अगर कोई बच जाता है तो आप सिर्फ उसकी ही जिंदगी नही बचाते बल्कि उससे जुडे तमात उन लोगों की जिदंगी बचाते है जो उस व्यक्ति से जुड़ा है। आपकी छोटी सही सहायता से किसी का घर अंधेरे से बच जाता है तो इससे बड़ी बात क्या है।
यह कहना है वर्ष 2010 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए अमित फोगाट का। अमित मूलत: गांव – लोहरवाड़ा जिला चरखी दादरी हरियाणा के रहने वाले है। अमित का कहना है कि असली जिंदगी वो होती है जो दूसरों के लिये जी जाये अपने लिये तो सब जीते है ।
छह साल की पाकिस्तानी बच्ची को कभी भूल नहीं पायेंगे अमित
अमित फोगाट के अनुसार, वर्ष 2016 में रविन्द्र धारिवाल से कोटला मुबारकपुर थाने में मुलाकात हुई। बात-चीत के दौरान समाज के लिये कुछ करने का विचार दोनों का मिल गया और वो भी रविन्द्र के साथ रक्तदान अभियान से जुड़ गये। अमित के अनुसार, उन्होंने अब तक करीब 86 लोगों को ब्लड डोनेट किया है। इसमें वह पाकिस्तान से आई छह साल की बच्ची को कभी भूल नहीं पायेंगे। अमित ने बताया वह ड्यूटी पर तैनात थे, तभी उन्हें एक कॉल आया कि मेदांता अस्पताल में एक बच्ची को खून की जरूरत है।
अमित तुरंत मेदांता अस्पताल पहुंचे। पूछताछ के दौरान पता चला कि एक छह साल की बच्ची जो कि पाकिस्तान से आई है उसे कैंसर है और उसे खून की सख्त जरूरत है। अमित ने अपने कुछ जानकारों को भी बुलाया और बच्ची को खून दिया। बच्ची के परिवार वाले बहुत रो रहे थे। खून देने के बाद वह चले गये। उसके बाद उन्हें यह पता नहीं चल पाया कि वो बच्ची कैसी है। इस बात को वो कभी भूल नहीं पायेंगे।
भारत जैसी मदद किसी देश में न मिलती….
अमित की माने तो ब्लड डोनेट के सफर में वह अफगानिस्तान की बुजुर्ग महिला को भी कभी भूल नहीं पायेंगे। वर्ष 2019 में एक अफगानिस्तान से आई 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला थी जो कैंसर से ग्रस्त थीं। व्हाट्सअप ग्रुप द्वारा अमित को पता चला कि एक महिला को खून की जरूरत है। वह राजीव गांधी अस्पताल में भर्ती थी। अमित तुरंत अस्पताल पहुंचे और महिला को खून दिया।
अमित ने कईयों बार उस महिला को खून दिया। जब वह ठीक हुई तो उन्होंने अमित से कहा कि “भारत जैसा दूसरा कोई देश नहीं है।” उनके यहां मेडिकल की अच्छी सुविधा नहीं है। भारत आने से पहले वह सोच रहे थे, अंजान शहर में उनकी कौन मदद करेगा। लेकिन यहां आने के बाद ऐसा लगा ही नहीं कि हम अंजान देश में है। इतने नेक दिल इंसान सिर्फ भारत में ही मिल सकते है। वह कभी भारत व यहां के लोगों नहीं भूलेंगी।
किसी की जान बच जाये तो लगता है कुछ अच्छा किया
रविन्द्र धारीवाल ने अपने रक्तदान के सफर में करीब 78 लोगों को खून दिया है। इसमें कोवि़ड का वह पहला चरण भी शामिल है जिसमें मौत की लहरों ने सबको हैरान कर दिया था। कोरोना लहर में भी उन्होंने प्लाज्मा व रक्तदान किया।
रविन्द्र धारीवाल की माने तो वह बिना कुछ सोचे समझे रक्तदान करते है। उनके अनुसार, जरूरतमंद की जरूरत पूरी हो जाये और वह भी आगे इसी तरह किसी की मदद करे। रविन्द्र के अनुसार, ब्लड डोनेट के सफर में कुछ अच्छी तो कुछ दुखभरी यादे है। जिन्हें वह कभी भूल नहीं पायेंगे। रविन्द्र के अनुसार, वर्ष 2017 में राजीव गांधी कैंसर अस्पताल से उन्हें सूचना मिली कि एक 14 साल के बच्चे को कैंसर है और उसे खून की जरूरत है।
रविन्द्र तुरंत पहुंचे और खून दिया। जरूरत होने पर उन्होंने अपने साथियों को भी बुलाया और कई बार उस बच्चे को खून दिया। एक दिन उन्हें अस्पताल से फोन आया कि बच्चा बच नहीं पाया। उस दिन वह काफी दुखी हुए। ऐसे ही राजीव गांधी में एक मरीज विनोद (55) जो कि लुधियाना के रहने वाले है उनसे मुलाकात हुई। वह अंतिम स्टेज में थे। उन्हें भी रविन्द्र ने कई बार खून दिया। वो ठीक हुए। आज उनके बच्चे फोन करके बताते है भैया पापा ऑफिस जाने लगे है।
सोशल मीडिया में लोगों की बनाई चेन
रविन्द्र और अमित ने बताया कि उन्होंने टेलीग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक पर उन्होंने ग्रुप बना रखे है। ग्रुप का नाम ‘रक्त सेवक दिल्ली एनसीआर’ है। इसमें करीब दो हजार लोग जुडे है। उक्त ग्रुप में हरियाणा, गुडगांव दिल्ली के रहने वाले लोग जोड़ रखे है। जो एक दूसरे को रक्तदान के बारे में बताते है। इससे यह मदद मिलती है कि जिसके नजदीक पीड़ित होता है वह वहां पहुंच कर सहायता कर देता है। इसी में एक ग्रुप ‘पुलिस एंड फोर्स’ नाम से बनाया हुआ है। इसमें पुलिस एवं फोर्स के लोग जुडे है।
