नई दिल्ली, 4 अप्रैल (हि.स.)। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने संविधान की धारा 51ए के तहत दिए गए मौलिक कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग का विरोध किया है। अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि क़ानून मंत्रालय की वेबसाइट पर मौलिक कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी है। उन्होंने कहा कि जहां तक इस बारे में क़ानून बनाने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग है, कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।
अटार्नी जनरल ने साफ किया कि वो इस मामले में कोर्ट के कहने पर व्यक्तिगत हैसियत से अपनी राय रख रहे हैं। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इसमें सरकार का पक्ष रखेंगे। कोर्ट ने सरकार को पक्ष रखने के लिए चार हफ्ते का समय दिया। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान राज्य सरकारें भी जवाब दाखिल कर सकती हैं। 21 फरवरी को कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था।
याचिका वकील दुर्गा दत्त ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह समय की जरूरत है कि प्रत्येक नागरिक को भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने और उसकी रक्षा करने और अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए। इस देश के लोगों का कर्तव्य होना चाहिए कि वे देश की एकता और अखंडता की रक्षा करें। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार को इस पर विचार करने और संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग के रिपोर्ट के कार्यान्वयन के लिए शीघ्र उचित कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए थे।
