अगरतला, 6 नवंबर: आगामी त्रिपुरा नगर निकाय चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग ने 33 चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। शुक्रवार से ही उनके संबंधित क्षेत्रों में पहुंचने की उम्मीद है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भी पर्यवेक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहेंगे। यह जानकारी राज्य चुनाव आयुक्त प्रदीप कुमार चक्रवर्ती ने दी।
शुक्रवार को राज्य अतिथि गृह में नियुक्त चुनाव पर्यवेक्षकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्हें उनकी जिम्मेदारियों, जमीनी स्तर पर कार्यप्रणाली और आयोग को रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से निर्देश दिए गए।
राज्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पर्यवेक्षकों को मौखिक और लिखित रूप से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार शाम को वे अपने निर्धारित क्षेत्रों के लिए रवाना होंगे और नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उपस्थित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी स्थिति का जायजा लेंगे। इसके अलावा वे रिटर्निंग अधिकारियों से बातचीत करेंगे और मतदान केंद्रों का भी निरीक्षण करेंगे। चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों, जैसे नामांकन पत्रों की जांच, उम्मीदवारी वापस लेने, मतदान और मतगणना के दौरान उन्हें लगभग पांच चरणों में आयोग को रिपोर्ट सौंपनी होगी।
पर्यवेक्षकों की भूमिका स्पष्ट करते हुए प्रदीप कुमार चक्रवर्ती ने कहा कि वे चुनाव आयोग की आंख और कान के रूप में काम करते हैं। उनका मुख्य दायित्व निष्पक्ष रूप से स्थिति पर नजर रखना और किसी भी तरह की अनियमितता, चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन या हिंसक घटना की जानकारी आयोग को देना है। हालांकि, वे रिटर्निंग अधिकारियों को कोई निर्देश नहीं दे सकते, लेकिन जरूरत पड़ने पर सलाह दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि संबंधित क्षेत्र के सभी मतदान केंद्र पर्यवेक्षकों के निरीक्षण के दायरे में होंगे। मतगणना के दौरान भी वे मौजूद रहेंगे। यदि कहीं पुनर्मतदान की आवश्यकता पड़ती है, तो उस संबंध में पर्यवेक्षकों के आकलन और सुझावों पर भी आयोग विचार करेगा।
वहीं, ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के जवाब में राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत कराया जा रहा है। इस चुनाव में तीसरी बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें किसी भी नियम, दिशा-निर्देश या कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया जा रहा है।
दूसरी ओर, मोहनपुर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने के आरोपों को भी राज्य चुनाव आयुक्त ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है।
उन्होंने स्वीकार किया कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने मौखिक और लिखित रूप से आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव भी किया गया। हालांकि, संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों की ओर से इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई है।
प्रदीप कुमार चक्रवर्ती ने कहा कि पिछले तीन से चार दिनों से वह सभी रिटर्निंग अधिकारियों और जिला नगर चुनाव अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। किसी ने भी नामांकन पत्र स्वीकार करने में बाधा या किसी तरह की समस्या की जानकारी नहीं दी है।
उन्होंने आगे बताया कि आयोग के निर्देशानुसार रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों और वहां तक पहुंचने वाले रास्तों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी उम्मीदवार बिना किसी बाधा के अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सके।
राज्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, रिटर्निंग अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं थी और सुरक्षाकर्मियों की ओर से भी किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई। राज्य पुलिस महानिदेशक ने भी उन्हें बताया है कि किसी के साथ मारपीट करने या रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने की कोई शिकायत पुलिस के पास दर्ज नहीं हुई है।
उन्होंने दोहराया कि राज्य के सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से नामांकन पत्र दाखिल करने का पूरा अधिकार है। स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग की ओर से सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
राज्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि रिटर्निंग अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और जिला नगर चुनाव अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों एवं विचारों के आधार पर विपक्ष की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को वह पूरी तरह निराधार मानते हैं।
