नई दिल्ली, 04 नवंबर (हि.स.)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम को मजबूत करने और इनके प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना (कैपेक्स सपोर्ट स्कीम) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय रखा गया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत का क्रिटिकल मिनरल मिशन व्यवस्थित और सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ रहा है। इसी दिशा में आज क्रिटिकल मिनरल के प्रसंस्करण के लिए योजना को मंजूरी देना एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य खनन अथवा रीसाइक्लिंग से प्राप्त कच्चे माल का प्रसंस्करण कर उसे विनिर्माण के लिए तैयार करना है। सरकार की ओर से चिह्नित सभी 24 क्रिटिकल मिनरल इस योजना के दायरे में आएंगे। इसमें खदानों से निकाले गए खनिजों के साथ-साथ पुनर्चक्रण से प्राप्त कच्चे माल को भी शामिल किया गया है।
वैष्णव ने कहा कि इस पहल से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बैटरी, रक्षा उपकरणों तथा भारी उपकरणों एवं मशीनरी के विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इन सभी क्षेत्रों में क्रिटिकल मिनरल का व्यापक उपयोग होता है और इनके प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ने से संबंधित उद्योगों को लाभ होगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा हरित ऊर्जा, उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनरल की आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच यह योजना घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
