अगरतला, 28 अक्टूबर: विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान एक पुलिस इंस्पेक्टर को त्रिपुरा पुलिस सेवा (टीपीएस) के द्वितीय ग्रेड में पदोन्नति देने की मांग को त्रिपुरा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले के दंडात्मक आदेश को रद्द किए जाने के बावजूद, बाद में शुरू हुई विभागीय जांच लंबित रहने पर पदोन्नति में बाधा आ सकती है।
न्यायमूर्ति विश्वजीत पालित ने पुलिस इंस्पेक्टर सुरसेन त्रिपुरा द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता के कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को वर्ष 2021 और 2023 में उच्च पदों पर पदोन्नति दी गई थी, जबकि उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पिछली तारीख से पदोन्नति देने और उससे जुड़े सभी लाभ प्रदान करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
मामले के अनुसार, इससे पहले एक विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत उनकी वेतनवृद्धि को संचयी प्रभाव के बिना रोकने का दंड दिया गया था। हालांकि, 6 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने उस दंडात्मक आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही, अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि दंड नहीं दिए जाने की स्थिति में उन्हें मिलने वाले लाभ बहाल किए जाएं।
इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। संबंधित अधिकारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि 24 जनवरी 2024 को उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप में एक अन्य विभागीय जांच शुरू की गई थी, जो उस समय तक लंबित थी। इसी आधार पर उनकी पदोन्नति की मांग स्वीकार नहीं की गई।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि पहले के दंडात्मक आदेश को रद्द करने का अर्थ यह नहीं है कि बाद में शुरू हुई विभागीय जांच के कारण उत्पन्न बाधा भी स्वतः समाप्त हो जाएगी। जांच लंबित रहने तक पदोन्नति के लिए दोबारा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक बुलाने या पदोन्नति देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
न्यायमूर्ति विश्वजीत पालित ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने के कारण उसके निष्कर्ष आने तक पदोन्नति के संबंध में कोई निर्देश देना उचित नहीं होगा।
हालांकि, अदालत ने संबंधित अधिकारियों को छह महीने के भीतर विभागीय जांच पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर संबंधित विभागीय कार्यवाही समाप्त हो जाएगी। जांच पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता उचित प्राधिकारी के समक्ष फिर से आवेदन कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा हाईकोर्ट ने यह फैसला 24 सितंबर 2026 को सुनाया था।
