कोलकाता पूजा पंडाल हादसा: 18 की मौत, 12 हिरासत में; हाई कोर्ट के जज की निगरानी में एसटीएफ जांच की मांग

कोलकाता, 18 अक्टूबर (हि.स.)। महासप्तमी की शाम कोलकाता के चोरबगान सार्वजनीन पूजा पंडाल में मची भगदड़ ने भीषण त्रासदी का रूप ले लिया । इस हादसे में रविवार सुबह तक 18 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 25 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। राज्य सरकार ने घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कड़े कदम उठाए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा में लापरवाही के संदेह में पूजा समिति के आयोजकों और स्वयंसेवकों समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय के साथ कोलकाता मेडिकल कॉलेज पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, सप्तमी की शाम अचानक तेज बारिश शुरू होने और बाहर भारी ट्रैफिक जाम के कारण सैकड़ों दर्शनार्थियों ने एक साथ पंडाल के अंदर घुसने का प्रयास किया। इसी दौरान अंदर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। सूचना मिलते ही दमकल, कोलकाता पुलिस और डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को कोलकाता मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान मृतकों का आंकड़ा 18 तक पहुंच गया।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर एक वर्तमान न्यायाधीश के नेतृत्व में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के गठन की अपील करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रविवार को उच्च न्यायालय से इस त्रासदी की न्यायिक जांच का औपचारिक अनुरोध किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-डी की सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी और राज्य सरकार उनके चुने हुए किसी भी निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि सीसीटीवी फुटेज की सघन जांच की जा रही है और लापरवाही बरतने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

इस त्रासदी के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की स्थिति भी सवालों के घेरे में आ गई है। कोलकाता मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान जूनियर डॉक्टरों के एक वर्ग ने बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर जमकर क्षोभ व्यक्त किया। जूनियर डॉक्टरों का आरोप है कि इतने बड़े और प्रमुख मेडिकल कॉलेज में कोई आपातकालीन ट्रोमा केयर सेंटर ही नहीं है और न्यूरो सर्जरी विभाग की हालत भी बेहद खराब है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के उस कदम पर भी कड़ी आपत्ति जताई जिसमें 7-8 गंभीर मरीजों को आनन-फानन में निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने अंदेशा जताया है कि ज्यादातर मौतें भीड़ के दबाव में दम घुटने के कारण हुई हैं।

इस हृदयविदारक घटना पर पूरे देश में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। वहीं, बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने घटना के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष के इन हमलों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवेदनशील समय में राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने विरोधियों को निशाने पर लेते हुए पिछले साल पूजा के दौरान करंट लगने से हुई 13 मौतों और दार्जिलिंग में अचानक आई बाढ़ की त्रासदियों का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल घायलों का इलाज और पीड़ितों को न्याय दिलाना है।

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