- गेहूं उत्पादन में 80 हजार मीट्रिक टन की हुई बढ़ोतरी
भोपाल/टीकमगढ़, 12 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न मानकों पर बेहतर प्रदर्शन के लिए मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत मिली इस उपलब्धि के साथ जिले में गेहूं उत्पादन बढ़कर 6.92 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। उड़द की बोवनी का रकबा भी निर्धारित लक्ष्य से 16.68 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है।
नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को सम्मान प्रदान किया। योजना का एक वर्ष पूरा होने पर आयोजित कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के पांच जिलों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। टीकमगढ़ के अलावा उमरिया, सीधी, शहडोल और डिंडोरी जिलों के कलेक्टरों को भी सम्मानित किया गया। इन जिलों का चयन कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर किया गया है।
कलेक्टर श्रोत्रिय ने बताया कि केंद्र सरकार योजना के तहत चयनित जिलों की प्रगति की नियमित मासिक समीक्षा करती है। इसके लिए धन-धान्य कृषि योजना के डैशबोर्ड पर दर्ज आंकड़ों और निर्धारित प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) के मुकाबले जिलों की उपलब्धियों का आकलन किया जाता है।
टीकमगढ़ में गेहूं उत्पादन के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में जिले में 6.12 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 6.92 लाख मीट्रिक टन हो गया। इस तरह दो वर्षों में उत्पादन में करीब 80 हजार मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई। गेहूं की खेती का रकबा भी बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में जहां 2.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं बोया गया था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसका क्षेत्रफल 2.22 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया। उत्पादन और रकबे में हुई इस वृद्धि को जिले के कृषि प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया है।
खरीफ सीजन में भी टीकमगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य हासिल किया। जिले में खरीफ फसलों का कुल क्षेत्रफल 2,30,810 हेक्टेयर रहा, जबकि लक्ष्य 2,30,800 हेक्टेयर निर्धारित किया गया था। उड़द की बोवनी का रकबा निर्धारित लक्ष्य से 16.68 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी जिले ने प्रगति की। योजना के तहत 134 नए जल संग्रहण ढांचे तैयार करने का लक्ष्य पूरा किया गया। हालांकि, वाटरशेड घटक में लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सका। इसके तहत 8,975 हेक्टेयर क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य था, जबकि 7,392 हेक्टेयर क्षेत्र में ही कार्य किया गया।
कृषि के साथ आजीविका के अन्य साधनों को बढ़ावा देने के मामले में भी जिले की उपलब्धियां सामने आई हैं। मत्स्य पालन क्षेत्र में 461 इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य था, जबकि जिले में 529 इकाइयां दर्ज की गईं। इस तरह इस क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल हुई। प्राकृतिक खेती से भी किसानों का जुड़ाव बढ़ा है। जिले में 5,225 किसान 2,090 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसके अलावा 1,983 किसान जैविक खेती से जुड़े हैं। इन प्रयासों को कृषि के विविधीकरण और वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है।
सहकारिता क्षेत्र में भी जिले ने निर्धारित व्यवस्थाएं पूरी की हैं। टीकमगढ़ की सभी 64 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में कंप्यूटर हार्डवेयर, इंटरनेट और ई-पैक्स से संबंधित व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। इससे समितियों के कामकाज में डिजिटल सुविधाओं के उपयोग का आधार तैयार हुआ है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों के तहत महिला किसान उत्पादक कंपनी से 1,200 महिलाएं जुड़ी हैं। कृषि, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, सहकारिता और जल संरक्षण से संबंधित उपलब्धियों को जिले के समग्र कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रदर्शन का हिस्सा माना गया है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत मिले राष्ट्रीय सम्मान में इन विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज प्रगति की भूमिका रही है।
