वाशिंगटन, 09 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा कि आम लोग फायरिंग स्क्वाड के जरिए फोर्ट हुड शूटर मेजर निदाल हसन को दी जाने वाली सजा-ए-मौत को देख सकेंगे, क्योंकि उसे टेक्सास बेस पर सबके सामने सजा दी जाएगी। इसी बेस पर उसने 2009 में 13 लोगों की जान ली थी और 32 लोगों को घायल किया था।
एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 90 वर्ष से सजा-ए-मौत को सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया गया है। हेगसेथ के बयानों से यह सवाल उठता है कि सेना लोगों को इसे देखने की इजाजत कैसे देगी। हेगसेथ ने गुरुवार को ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ को बताया कि हसन को सैनिकों का एक फायरिंग स्क्वाड 03 दिसंबर को टेक्सास के किलीन के पास फोर्ट हुड में सजा-ए-मौत देगा।
उन्होंने कहा, “हम यह पक्का करेंगे कि लोग इसे देख सकें। यह सार्वजनिक हो। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि ऐसी घटना के गंभीर नतीजे होते हैं।” एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन का कहना है कि सजा-ए-मौत की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी। पेंटागन ने यह नहीं बताया कि स्ट्रीम को खास तौर पर कहां दिखाया जाएगा। रक्षा विभाग ने हेगसेथ के बयानों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। कहा गया है कि 1961 के बाद से यह अमेरिकी सेना द्वारा दी जाने वाली पहली सजा-ए-मौत होगी। फायरिंग स्क्वाड के जरिए अमेरिकी सेना ने 1945 में सजा-ए-मौत दी थी। अमेरिका में फायरिंग स्क्वाड के जरिए सजा-ए-मौत का चलन बहुत कम है।
डेथ पेनल्टी इनफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, सिर्फ इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा ही इस तरीके की सजा की इजाजत देते हैं। पिछले साल साउथ कैरोलिना ने राज्य में पहली बार फायरिंग स्क्वाड के जरिए सजा-ए-मौत दी थी। यह पिछले 15 वर्ष में अमेरिका में ऐसी पहली घटना थी। अमेरिका में सजा-ए-मौत का आखिरी सार्वजनिक मामला 1936 में हुआ था। तब केंटकी में रेनी बेथिया नाम के एक अश्वेत व्यक्ति को फांसी दी गई थी। उसे एक श्वेत महिला के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया गया था।
हेगसेथ ने कहा कि सजा फोर्ट हुड में ही मिलनी चाहिए, क्योंकि हसन ने वहीं जानलेवा गोलीबारी की थी। उन्होंने कहा कि राइफल से लैस सैनिक फायरिंग स्क्वाड बनाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि सजा दोपहर एक बजे होगी, ठीक उसी समय जब हमला हुआ था। अमेरिकी सेना ने एग्जीक्यूशन के लिए तीन दिसंबर 2026 को दोपहर एक बजे (सेंट्रल स्टैंडर्ड टाइम) का समय फोर्ट हुड में तय किया है। सेना के अनुसार, हेगसेथ की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अक्टूबर को मौत की सजा को मंजूरी दी।
